CJP कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ी

कानून के प्रति सम्मान नहीं, शांति भंग करने की आशंका गंभीर

  • दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने CJP कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन बढ़ाई।

  • अदालत ने कहा कि दोनों का आचरण कानून के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है और सार्वजनिक शांति भंग होने की गंभीर आशंका है।

  • अदालत ने प्रस्तुत दोनों जमानतदारों को अनुपयुक्त पाते हुए नई जमानत प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

  • मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के आह्वान और पुलिस को दिए आश्वासन के कथित उल्लंघन से जुड़ा मामला।

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली ,20 अक्टूबर : दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए उनकी न्यायिक हिरासत दो दिनों के लिए बढ़ा दी है।

सोमवार, 19 अक्टूबर को मामले की सुनवाई करते हुए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऋतु राज ने कहा कि दोनों कार्यकर्ताओं का पिछला आचरण कानून के प्रति सम्मान की कमी दर्शाता है। अदालत ने सार्वजनिक शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका को गंभीर माना।

अदालत के अनुसार, जांच अधिकारी की ओर से प्रस्तुत आवेदन के समर्थन में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध थी, जिससे शांति भंग होने की संभावना को बिना उचित विचार किए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं किए गए स्थानों पर बार-बार विरोध प्रदर्शन का आह्वान करना उनके आचरण में दोहराव की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

अदालत ने दोनों जमानतदारों को पाया अनुपयुक्त

सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से प्रस्तुत जमानतदारों की विश्वसनीयता और पात्रता पर भी सवाल उठे।

अदालत ने पाया कि एक जमानतदार के बॉन्ड पर लगी तस्वीर और उसके आधार कार्ड की तस्वीर में अंतर था। वह कोई अन्य वैध पहचान दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछे गए सवालों के जवाब भी अदालत को संतोषजनक नहीं लगे।

दूसरा जमानतदार सौरव दास के संबंध में बुनियादी जानकारी तक उपलब्ध नहीं करा सका।

अदालत ने कहा कि जांच से स्पष्ट हुआ कि दोनों जमानतदारों की प्रतिवादियों पर ऐसी कोई प्रभावी पकड़ नहीं थी, जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर उनकी अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित कर सकें।

इसी आधार पर अदालत ने दोनों जमानतदारों को अस्वीकार करते हुए नए जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

पुलिस को दिए आश्वासन के उल्लंघन का आरोप

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने 11 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए आश्वासन का कथित रूप से उल्लंघन किया।

पुलिस के अनुसार, दोनों ने लोगों से जंतर-मंतर पर एकत्र होने का आह्वान किया, जबकि संबंधित स्थान को विरोध प्रदर्शन के लिए अधिसूचित क्षेत्र की सूची से हटाया जा चुका था।

पुलिस ने आरोप लगाया कि दोनों कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस जैसे गैर-निर्धारित स्थानों पर लोगों को प्रदर्शन के लिए बार-बार संगठित करने का प्रयास कर रहे थे।

पुलिस अधिकारियों ने पूर्ववर्ती अदालत को प्राप्त एक अज्ञात, कथित रूप से धमकी भरे व्हाट्सऐप संदेश का भी उल्लेख किया। इस संबंध में अलग से दैनिक डायरी प्रविष्टि दर्ज की गई थी। हालांकि, प्रस्तुत रिपोर्ट में इस संदेश को दोनों कार्यकर्ताओं से जोड़ने की पुष्टि नहीं की गई है।

13 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे दोनों कार्यकर्ता

CJP मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं का विरोध कर रही है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया था। पुलिस का आरोप था कि दोनों ने बैरिकेड लगाए गए जंतर-मंतर परिसर के गेट पर चढ़कर प्रवेश किया था।

इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर दोनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

बचाव पक्ष ने आरोपों का किया खंडन

सुनवाई के दौरान दोनों कार्यकर्ताओं के वकील ने हिरासत बढ़ाने का विरोध किया और तत्काल रिहाई की मांग की।

बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वासन दिया कि दोनों कथित गतिविधियों को दोबारा नहीं दोहराएंगे।

वकीलों ने पुलिस के इस आरोप को भी चुनौती दी कि दोनों ने 10 अक्टूबर के बाद विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था।

हालांकि, अदालत ने उनके पूर्व आचरण को देखते हुए इस आश्वासन को पर्याप्त विश्वसनीय नहीं माना और हिरासत बढ़ाने का आदेश दिया।

21 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की है।

यह मामला एक बार फिर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लागू कानूनी प्रतिबंधों के बीच संतुलन के प्रश्न को सामने लाता है।

अदालत की टिप्पणियां फिलहाल शांति भंग होने की आशंका और संबंधित कार्यवाही से जुड़ी हैं। इन्हें किसी आपराधिक आरोप पर अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।

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