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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बरहेट विधानसभा क्षेत्र से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए।
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दस्तावेजों में ‘मीता देवी’ और ‘फातिमा बीबी’ के नामों के साथ एक ही आधार संख्या होने की बात सामने आई है।
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झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने संबंधित दस्तावेजों और पहचान संबंधी विसंगतियों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
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दुबे ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग को बदनाम करने की कथित विदेशी साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली/रांची, 1 नवंबर: झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहेट विधानसभा क्षेत्र में एक महिला की दो अलग-अलग नामों से पहचान संबंधी दस्तावेज सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले को उठाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए दस्तावेजों का हवाला देते हुए दुबे ने आरोप लगाया कि झारखंड में वंशावली प्रमाणपत्रों के माध्यम से कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को भारतीय मतदाता बनाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस मामले को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विपक्षी अभियान से भी जोड़ा है।
‘मीता देवी ही फातिमा है’—निशिकांत दुबे का दावा
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा कि मीता देवी और फातिमा एक ही व्यक्ति हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वंशावली प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल करके बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय पहचान और मतदाता सूची में स्थान दिलाया जा रहा है। दुबे ने इस मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट से जोड़ते हुए राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
उनका दावा है कि कथित पहचान संबंधी अनियमितताएं मतदाता सूची की विश्वसनीयता के लिए गंभीर चुनौती हैं।
एक आधार संख्या और दो नामों पर जांच
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड के मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग से संबंधित एक पत्र में फातिमा बीबी नामक महिला की पहचान को लेकर शिकायत का उल्लेख है।
दस्तावेजों के अनुसार, महिला का पूर्व नाम मीता देवी बताया गया है और दोनों नामों से संबंधित अभिलेखों में एक ही आधार संख्या दर्ज होने की बात सामने आई है।
इस मामले में 23 सितंबर 2026 को बरहेट के अंचल अधिकारी द्वारा जारी वंशावली प्रमाणपत्र का भी उल्लेख किया गया है। प्रमाणपत्र में फातिमा बीबी को नेजामुद्दीन मोमिन की पुत्री के रूप में दर्शाए जाने की जानकारी दी गई है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने पहचान संबंधी विसंगति, आधार संख्या और वंशावली प्रमाणपत्र जारी होने की परिस्थितियों की जांच के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, नाम बदलना या विवाह के बाद अलग नाम अपनाना अपने आप में अवैध गतिविधि का प्रमाण नहीं है। जांच में यह निर्धारित किया जाना आवश्यक है कि संबंधित दस्तावेज सही हैं या उनमें कोई अनियमितता हुई है।
राहुल गांधी पर विदेशी साजिश का आरोप
निशिकांत दुबे ने इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बदनाम करके पद से हटाने के लिए विदेशी प्रभाव वाला अभियान चलाया जा रहा है।
दुबे ने अपने बयान में जॉर्ज सोरोस और नेविल रॉय सिंघम से जुड़े कथित नेटवर्क का उल्लेख करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन गेमिंग से संबंधित गतिविधियों पर भी सवाल उठाए।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।
विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूचियों में गलत, दोहरी और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।
बरहेट प्रकरण में जांच क्यों महत्वपूर्ण?
बरहेट का यह मामला केवल एक महिला के नाम या पहचान तक सीमित नहीं है। यदि जांच में किसी प्रकार की दस्तावेजी धोखाधड़ी या गलत मतदाता पंजीकरण सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।
अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या बरहेट के दस्तावेजों में वास्तविक अनियमितता पाई जाती है और यदि ऐसा है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है?
निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष ही इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकेंगे।
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