अरब सागर में नौसेना का ऑपरेशन, 20 क्रू मेंबर बचाए

मुंबई से 3000 किलोमीटर दूर अरब सागर में भारतीय नौसेना ने वायुसेना के सहयोग से समुद्री लुटेरों के चंगुल से जहाज 'अजिनी' और 20 नाविकों को सकुशल मुक्त कराया।

  • अरब सागर में भारतीय नौसेना ने चलाया 48 घंटे का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन।
  • समुद्री लुटेरों के कब्जे से मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ को छुड़ाया।
  • जहाज पर सवार सभी 20 क्रू मेंबर सुरक्षित बचाए गए, रक्षा मंत्री ने सराहना की।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 03 नवंबर: भारतीय नौसेना ने एक बार फिर समंदर में अपनी अदम्य वीरता और उच्च पेशेवर क्षमता का लोहा मनवाया है। अरब सागर में भारतीय नौसेना ने एक बेहद जोखिम भरे और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए सशस्त्र समुद्री लुटेरों के चंगुल से मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ (Azini) और उस पर सवार सभी 20 चालक दल (क्रू) के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया है। यह सनसनीखेज और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन भारतीय मुख्य तट यानी मुंबई से लगभग 3,000 किलोमीटर दूर समुद्र की गहराइयों में चलाया गया।

करीब 48 घंटों तक चले इस मैराथन और सुनियोजित अभियान में भारतीय नौसेना को भारतीय वायु सेना (IAF) का भी समय पर और महत्वपूर्ण सहयोग मिला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना और वायुसेना के इस संयुक्त पराक्रम की खुले शब्दों में सराहना की है।

क्या था पूरा मामला और कैसे चला अभियान?

विस्तृत जानकारी के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी सोमालिया के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ को सशस्त्र समुद्री लुटेरों ने हाईजैक कर लिया था। जहाज पर सवार नाविकों और क्रू मेंबर्स को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलते ही भारतीय नौसेना का तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया।

मुंबई से 3,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर स्थित होने के बावजूद, नौसेना ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपनी संपत्तियों को रणनीतिक रूप से तैनात किया। लगभग 48 घंटे तक चले इस सटीक ऑपरेशन के दौरान नौसेना के कमांडो और युद्धपोतों ने आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से समुद्री लुटेरों की हर गतिविधि को ट्रैक किया और उन्हें घेर लिया। भारतीय वायु सेना की समय पर मिली रसद और सामरिक सहायता ने इस ऑपरेशन को और अधिक धार दी, जिसके परिणामस्वरूप लुटेरों के मंसूबों पर पानी फेर दिया गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की नौसेना की सराहना

इस ऐतिहासिक और सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के पूरा होने पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय नौसेना को बधाई दी और उनकी पीठ थपथपाई। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इतनी लंबी दूरी पर, महज 48 घंटों के भीतर सुनियोजित तरीके से चलाए गए इस ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में सुरक्षा और शांति का सबसे बड़ा पहरेदार है।

रक्षा मंत्री ने भारत के इस संकल्प को दोहराया कि देश क्षेत्रीय जलमार्गों में आवाजाही को सुरक्षित रखने, अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता को बनाए रखने और समुद्री आतंकवाद व लूटपाट जैसी ताकतों के खिलाफ हरसंभव कदम उठाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

वैश्विक समुद्री सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका

पिछले कुछ वर्षों में हिंद महासागर, अरब सागर और अदन की खाड़ी के इलाकों में सोमालियाई लुटेरों की गतिविधियों में एक बार फिर इजाफा देखा गया है। ऐसे में भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (First Responder) और ‘पसंदीदा सुरक्षा साझीदार’ के रूप में उभरकर सामने आई है। इससे पहले भी नौसेना ने कई बार विदेशी झंडों वाले जहाजों और अन्य देशों के नागरिकों को समुद्री डकैतों के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाला है।

‘अजिनी’ जहाज और उसके 20 विदेशी क्रू सदस्यों को बचाने की इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय नौसेना की ब्लू-वाटर क्षमताओं (Blue-Water Capabilities) और मानवीय व रक्षात्मक प्रतिबद्धताओं का डंका बजा दिया है।

निष्कर्ष

अरब सागर में अंजाम दिया गया यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन केवल एक जहाज को बचाने की घटना नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अपने समुद्री सीमाओं के आसपास अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों और नाविकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है। भारतीय नौसेना के इस अदम्य साहस और पेशेवर दक्षता ने एक बार फिर वैश्विक पटल पर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

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