दिल्ली में 15 हजार निर्वाचित छात्र नेताओं का महाकुंभ

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) दिल्ली के आह्वान पर देशभर के विश्वविद्यालयों से आए छात्र प्रतिनिधियों ने 'अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ' का सामूहिक संकल्प लिया।

  • दिल्ली में 15,000 निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का ऐतिहासिक महाजुटान।
  • अभाविप ने ‘अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ’ का दिया नारा।
  • संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का लिया संकल्प।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 06 नवंबर: देश की राजधानी नई दिल्ली में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप – ABVP) दिल्ली के विशेष आह्वान पर देशभर के प्रमुख विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के निर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों का एक विशाल और अभूतपूर्व महाकुंभ आयोजित हुआ। इस राष्ट्रीय महाजुटान में देश के विभिन्न कोनों से आए 15,000 से अधिक छात्र प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। दिल्ली विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय, लद्दाख विश्वविद्यालय, उत्कल विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय तथा डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हाल ही में संपन्न हुए छात्रसंघ चुनावों में भारी जनादेश हासिल करने वाले इन छात्र नेताओं ने एक मंच पर एकत्रित होकर राष्ट्र के सामने एक स्पष्ट संदेश दिया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर ‘अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ’ के बुलंद नारों से गूंज उठा। लाखों विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और जनादेश का प्रतिनिधित्व कर रहे इन छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि भारत के शैक्षणिक परिसरों और राष्ट्रीय जीवन में अराजकता, असंवैधानिक तरीकों और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है।

छात्र गर्जना रैलियों की श्रृंखला का भव्य राष्ट्रीय स्वरूप

देशभर में अभाविप द्वारा चलाए जा रहे ‘अराजकता छोड़ो, लोकतंत्र अपनाओ’ अभियान के अंतर्गत यह महाजुटान छात्र गर्जना रैलियों की कड़ी का सबसे बड़ा और प्रभावकारी पड़ाव साबित हुआ। दिल्ली, पंजाब, लद्दाख, उत्तराखंड, ओडिशा, असम और पूर्वोत्तर के राज्यों से आए छात्र नेताओं ने इस बात पर बल दिया कि विश्वविद्यालय केवल उच्च शिक्षा प्राप्त करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे देश के भावी लोकतांत्रिक नेतृत्व को गढ़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगशालाएं हैं।

इस महाजुटान में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के अध्यक्ष यश डबास, सचिव रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव लक्ष्य राज सिंह; पंजाब विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अंकित भिदान एवं पूर्व अध्यक्ष गौरववीर सोहल; लद्दाख विश्वविद्यालय के निर्वाचित प्रतिनिधि; डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष नवदीप राणा; उत्कल विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष अभिराम; गुवाहाटी विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष मानस प्रतिम कलिता तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व संयुक्त सचिव वैभव मीणा समेत सैकड़ों प्रमुख छात्र चेहरे शामिल हुए। इन सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि चुनाव जीतना केवल पद पाना नहीं है, बल्कि उस जनादेश का सम्मान करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखना उनका प्राथमिक कर्तव्य है।

अभाविप राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी का विपक्ष पर तीखा हमला

महाजुटान को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संवैधानिक मर्यादाओं और युवाओं की भूमिका पर एक विस्तृत और ओजस्वी विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है, और इसकी वास्तविक ताकत देश के आम नागरिकों द्वारा दिए जाने वाले जनादेश, भारत के संविधान और हमारी स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता में निहित है।

डॉ. सोलंकी ने कहा, “राजनीतिक असहमति और सरकार की नीतियों की आलोचना करना लोकतंत्र का एक स्वाभाविक और अभिन्न अंग है। लेकिन अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों को साधने के लिए देश की निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति आम नागरिकों के मन में जानबूझकर अविश्वास पैदा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।”

उन्होंने सीधे तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों को कठघरे में खड़ा करते हुए सवाल दागा कि यदि उन्हें देश की संवैधानिक निर्वाचन प्रक्रियाओं पर कोई वास्तविक या ठोस आपत्ति है, तो वे उसे प्रमाणों के साथ संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और अदालतों के सामने प्रस्तुत क्यों नहीं करते? राजनीतिक आरोपों, अनर्गल बयानों और जनमानस में भ्रम पैदा करके सड़कों पर दबाव बनाने की कोशिश करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल विपरीत है।

‘बांग्लादेश या नेपाल की परिस्थितियां भारत का मॉडल नहीं बन सकतीं’

अपने संबोधन के दौरान डॉ. सोलंकी ने पड़ोस में घटे हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का संदर्भ देते हुए कहा कि बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में बनी अस्थिरता और अराजकता की परिस्थितियां भारत के लोकतांत्रिक भविष्य का कोई खाका नहीं हो सकतीं। भारत का युवा अराजकता, सड़क पर भीड़ के दबाव और हिंसा में विश्वास नहीं रखता, बल्कि वह संविधान, राष्ट्रीय दायित्व और लोकतांत्रिक सहभागिता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने राहुल गांधी के सार्वजनिक भाषणों पर तंज कसते हुए कहा कि जो नेता मंचों से ‘Smash the Patriarchy’ और महिला सशक्तीकरण की बातें करते हैं, उन्हें सबसे पहले अपने राजनीतिक संगठनों के भीतर महिलाओं को निर्णायक नेतृत्व की भूमिका देनी चाहिए। यदि बातें केवल राजनीतिक भाषणों तक सीमित रहेंगी और सांगठनिक व्यवहार में समानता नहीं दिखेगी, तो देश का युवा ऐसे दोहरे मापदंडों को भली-भांति समझता है।

परिसरों में सकारात्मक छात्र राजनीति की आवश्यकता: सार्थक शर्मा

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने दिल्ली के इस विशाल सम्मेलन को भारतीय लोकतंत्र में युवाओं के प्रगाढ़ विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों से आए निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों का यह दायित्व है कि वे अपने-अपने परिसरों में किसी भी प्रकार के हिंसक प्रदर्शनों या अराजक माहौल को पनपने न दें।

सार्थक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में सकारात्मक छात्र राजनीति, विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान और अनुशासित संवाद की संस्कृति को पुनर्जीवित करने की सख्त जरूरत है। अभाविप का प्रत्येक कार्यकर्ता और निर्वाचित प्रतिनिधि देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में लोकतांत्रिक मूल्यों, छात्र अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।

डूसू अध्यक्ष यश डबास ने जताया लोकतांत्रिक चेतना पर विश्वास

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) के अध्यक्ष यश डबास ने देशभर से आए छात्र प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह महाजुटान भारत के छात्रों की एकजुटता और उच्च लोकतांत्रिक चेतना को उजागर करता है। डबास ने कहा कि विचार भिन्नता होना किसी भी जीवंत लोकतंत्र की पहचान है और असहमति का सदैव सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन असहमति के नाम पर अराजकता फैलाना, राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या देश की संवैधानिक संस्थाओं की साख पर हमला करना कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि इस महाजुटान के माध्यम से उपस्थित सभी 15,000 छात्र प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अनुशासन, लोकतांत्रिक संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं को मजबूती से लागू करने का संकल्प लिया है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली में अभाविप द्वारा आयोजित यह विशाल छात्र महाकुंभ केवल एक सम्मेलन मात्र नहीं था, बल्कि यह देश के युवा वर्ग द्वारा अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली और संवैधानिक ढांचे में फिर से गहरा विश्वास व्यक्त करने का एक ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ। 15 हजार निर्वाचित छात्र प्रतिनिधियों के इस साझा संकल्प ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत का युवा राष्ट्र निर्माण, अनुशासन और विधि के शासन के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा है।

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