समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 23जून। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल की सरकार के गठन के बाद बीजेपी के संगठन पर सभी की निगाहें हैं। बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को योगी कैबिनेट में मंत्री पद दिया जा चुका है। बीजेपी में एक व्यक्ति-एक पद की परंपरा रही है और इसी परंपरा के अनुसार स्वतंत्रदेव सिंह को कोई एक पद छोड़ना पड़ेगा। गौरतलब है कि स्वतंत्र देव सिंह पिछली योगी सरकार में भी मंत्री थे, लेकिन लोकसभा चुनाव 2019 के बाद तत्कालीन अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय को मोदी कैबिनेट में शामिल करने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। तब स्वतंत्र देव सिंह को यूपी बीजेपी की कमान सौंपी गई थी। अब इस बार पद छोड़ने की बारी स्वतंत्रदेव सिंह की है।
कब होगी नए अध्यक्ष की घोषणा?
बीजेपी राष्ट्रीय संगठन के एक अधिकारी ने बताया कि, “उत्तर प्रदेश में रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनावों के परिणाम के बाद इसकी घोषणा हो जायेगी।” उन्होंने बताया कि, “यह तय है कि 2-3 जुलाई को तेलंगाना में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष ही भाग लेगा।”
कौन होगा नया अध्यक्ष?
नया अध्यक्ष कौन होगा? यह पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि नाम तय हो चुका है लेकिन इसका ऐलान आधिकारिक घोषणा के तहत ही किया जाएगा। चर्चा में चल रहे नामों को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि, “चर्चाओं का क्या, वो तो चलती ही रहती हैं, लेकिन आधिकारिक ऐलान पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा।”
वहीं इससे इतर एक नाम आगरा से सांसद और केंद्र से मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल का भी चल रहा है। इसके पीछे कारण यह दिया जाता है कि आगामी लोकसभा चुनावों में बीजेपी यूपी में समाजवादी पार्टी से अपनी प्रमुख लड़ाई मानकर चल रही है। इसे देखते हुए एसपी सिंह बघेल बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। क्योंकि बघेल ने विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव के खिलाफ ताल ठोकी थी और कड़ी टक्कर दी थी। वह पूर्व में सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव सुरक्षा अधिकरी भी रह चुके हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उनके नाम पर भी विचार चल रहा है। नए अध्यक्ष का नाम बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व के अलावा किसी और को नहीं मालूम लेकिन यह तय है कि नाम की घोषणा जल्द ही होगी।
ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेल सकती है बीजेपी
चर्चा तो इस बात की भी है कि एक बार फिर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी ब्राह्मण चेहरे पर ही पार्टी दांव लगा सकती है. इसमें सबसे ऊपर पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा का नाम है. हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई को भी रेस में शामिल माना जा रहा है. दरअसल बूथ कमेटी की बैठक में राज्यसभा के सदस्यों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन लक्ष्मीकांत बाजपेई को उससे अलग रखा गया. जबकि कन्नौज से सांसद सुब्रत पाठक और केंद्रीय पदाधिकारी हरीश द्विवेदी के नाम को लेकर भी चर्चा काफी तेज है.
ये नाम भी हैं चर्चा में
इसके अलावा कुछ और भी नाम है जो अध्यक्ष की रेस में शामिल है जिसमें एमएलसी, पूर्व मंत्री और सांसद हैं. दूसरी बार एमएलसी चुने गए और काशी क्षेत्र से आने वाले लक्ष्मण आचार्य, एमएलसी विद्यासागर सोनकर और कौशांबी के सांसद विनोद सोनकर का भी नाम चर्चा में है. हाल ही में राज्यसभा के निर्वाचित बाबूराम निषाद और पूर्व परिवहन मंत्री अशोक कटारिया भी इस पद के दावेदार माने जा रहे हैं.
Comments are closed.