गुस्ताखी माफ़ हरियाणा: मिलिए मनोहर लाल के नवरत्नों से

गुस्ताखी माफ़ हरियाणा: मिलिए मनोहर लाल के नवरत्नों से

पवन कुमार बंसल।

जवाहर यादव, अजय गौड़, सुनील, नीरज दफतुर, अनिल यादव, डी एस देशी, कुठियाला, अमित अग्रवाल, भूपेश्वर दयाल अभिमन्यु,  भारती
और संरक्षक अमित शाह , मोदी और संघ के कार्यवाह अरुण जी।

अकबर की तरह आधुनिक महाराज मनोहर लाल का भी अपना दरबार है। उसमे नवरत्न है। कई पर्दे के पीछे तो कई सार्वजनिक तौर पर।
राजेश खुल्लर।

मनोहर के एक नवरत्तन जनाब राजेश खुलर तो इन दिनों अमेरिका में है और उनकी कमी उन्हें अब भी महशूश हो रही है। चर्चा है वो वापिस आ रहे है और मनोहर कृपा से हरेरा गुरग्राम के जज के के खंडेलवाल की अवधि पूरी होने पर उनकी जगह लेने को बेताब है। वैसे उनके शुभचिंतको ने उन्हें यह बिन मांगी सलाह भी दी है की वो हरियाणा में वापिस न ही आये तो बेहतर है क्योंकि यहाँ आते ही उनकी बंद पड़ी कुंडली दोबारा खुल जाएगी।

जवाहर यादव

चीफ मिनिस्टर बनते ही मनोहर ने उन्हें अपना ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी लगाया। जनाब चौथे गैर में कार चलने लगे तो संघ के रडार पर आ गए। मजबूरन मनोहर को इनकी विदाई करनी पड़ी। ये पर्दे के पीछे सारे काम करने लगे। फिर किसी बोर्ड का चेयरमैन लगा दिया। अब बादशाहपुर से टिकट के दावेदार है।

नीरज दफतुर
मनोहर का सारा मीडिया मैनजमेंट जनाब देखते थे। किस अख़बार को विज्ञापन देना है और किस पत्रकार को मान्यता देनी है। जनाब भी चौथे गेर में कार चलाने लगे और संघ के राडार पर आ गए। संघ की तरफ से उनकी विदाई के निर्देश ने मनोहर को तड़फा दिया। तर्क दिया की में तो डमी चीफ मिनिस्टर हूँ। सारी नियुक्तियां तो ऊपर से होती है। मेने तो जवाहर यादव और नीरज को ही लगाया है। पहले जवाहर और अब नीरज को हटाने से तो मेरी अथॉरिटी खत्म हो जाएगी। पर संघ का आदेश तो वीटो पॉवर। मुख्यधारा से हटा दिया। अब दिल्ली में सफदरगंज एन्क्लेव से अपना सम्राजय चला रहे है। पिछले दिनों रात नो बजे उनकी मुलाकात चंडीगढ़ में मनोहर लाल से होनी थी। किसी दिलजले ने खबर छाप दी और मीटिंग कैंसिल हो गयी।

अजय गौर और सुनील
अजय  गौर अब पर्दे के पीछे से काम कर रहे है,  सुनील भी सक्रिय है।

भारती
विवादास्पद भारती उनके सलाहकार है।

बी के कुठियाला
शिक्षा महकमे के एडवाइजर है। उनके माध्यम से प्रदेश के विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण। जनाब पर काफी समय शनि की वक्र दृष्टि रही। फिर मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन से वो दशा ठीक हुई और अब परम आनंद ले रहे है। नैतिक शिक्षा पर भाषण देते है। एक सज्जन को किसी विश्वविद्यालय का कुलपति लगाने में मदद की तो उसने एहसान का बदला उतारते हुए जनाब को मीडिया की आनरेरी डॉक्टरेट की उपाधि से नवाज दिया।

ओ एस डी भूपेश्वर दयाल
मनोहर के निजी काम देखते है। उनकी सोनीपत कोठी पर डॉग स्क्वाड काफी चर्चा में है।

देसी , अनिल यादव और अमित अग्रवाल
उल्टे सीधे कामो पर जनाब देसी साहिब की मोहर लगवाते है। देसी शरीफ है और हर चीफ मिनिस्टर के हाथ की अंगूठी में फेविकोल की तरह चिपक जाते है। गुरुग्राम के किसी पुराने मामले में उनकी विवादास्पद भूमिका को लेकर मनोहर उन्हें ब्लैकमेल करते रहते है।

अनिल यादव
अनिल यादव पहले सी आई डी चीफ थे और रिटायर होने पर भी मनोहर उन्हें छोड़ नहीं रहे। अपने साथ रखा है।

अमित अग्रवाल
नीरज का रोल अब उनके जिम्मे। विज्ञापन और मीडिया पर विज्ञापन के रिमोट से नियंत्रित करना।किस पत्रकार को मान्यता देनी है।
अब चर्चा उनकी आकाओं की।

मोदी को भले वक्त में खिचड़ी खिलाई जो अब काम आ रही है। अमित शाह के आदेश सर माथे। संघ के अरुण जी ,जब अरुण जी का आशीर्वाद हो तो
मनोहर पवन जिंदल को ज्यादा भाव नहीं देते।

पटोदी वाले धर्म देव और सरकारी संत गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद।

पता नहीं सी आई डी चीफ आलोक मित्तल सही रिपोर्ट देते है या नहीं लेकिन छवि जीरो है।

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