समग्र समाचार सेवा
मैसूर, 2 सितंबर: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को मैसूर में अखिल भारतीय वाणी और श्रवण संस्थान (AIISH) की हीरक जयंती समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा, चिकित्सा और संचार विकारों के निदान व उपचार में संस्थान का योगदान उल्लेखनीय है।
उन्होंने इस ऐतिहासिक मौके पर सभी पूर्व और वर्तमान निदेशकों, संकाय सदस्यों, प्रशासकों और छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि एआईआईएसएच ने न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में अपनी पहचान स्थापित की है।
कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव और मैसूर के सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार भी उपस्थित थे। इसके अलावा भारत सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।
एआईआईएसएच: 60 साल की उत्कृष्टता की यात्रा
1965 में स्थापित एआईआईएसएच, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है। इसका उद्देश्य वाणी और श्रवण विकारों की देखभाल, अनुसंधान और पुनर्वास प्रदान करना है।
संस्थान डिप्लोमा से लेकर डॉक्टरेट और पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप तक के पाठ्यक्रम संचालित करता है। साथ ही यह नैदानिक सेवाओं, जन शिक्षा, अनुसंधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
आज एआईआईएसएच को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह न केवल रोगियों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराता है बल्कि उनके परिवारों को भी सहयोग प्रदान करता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में नई दिशा
राष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयास भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में एआईआईएसएच और भी बड़ी भूमिका निभाएगा और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को मजबूत करेगा।
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