समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 23 जुलाई: अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आयोजित एक समारोह में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच आने वाली बड़े पैमाने की लड़ाई को टाला, जिसमें पांच जेट विमान गिराए गए थे और यह कभी भी परमाणु संघर्ष में बदल सकता था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने तत्काल फोन पर दोनों देशों को चेताया और कहा कि अगर इसी तरह टकराव जारी रहा तो “व्यापार बंद हो जाएगा”— इससे बड़ी तबाही हो सकती थी।
ट्रंप का टकराव के बीच वह क्षण
ट्रंप ने विस्तार से बताया कि “भारत-पाकिस्तान में पांच विमान मार गिराए गए थे। वे एक-दूसरे पर बार-बार हमला कर रहे थे, और परमाणु ताकत बाल देशों की टकराहट परमाणु युद्ध में बदल सकती थी।” उन्होंने दावा किया कि उन्होंने तत्काल दोनों नेताओं से संपर्क किया और उनकी इस कार्रवाई ने क्षेत्र में परमाणु संकट टाल दिया।
ट्रंप का ग्लोबल पिटारा
इससे पहले भी ट्रंप ने बीते सप्ताह इस बात को दोहराया कि उन्होंने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को दबाया और कोसोवो‑सर्बिया के बीच तनाव को भी शांत किया है। उन्होंने एक बार फिर अमेरिकी जनादेश का राग अलापा, जिसमें कहा गया कि पूर्व राष्ट्रपति बाइडन ऐसी कार्रवाइयाँ नहीं कर पाएंगे।
यूएन में अमेरिका का दावा, भारत ने पलटवार किया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिकी राजदूत डोरोथी शीया ने यह दावा किया कि अमेरिका- ट्रंप की नीति के तहत पिछले तीन महीनों में भारत-पाकिस्तान, इजरायल-ईरान और कांगो‑रवांडा में तनाव कम किए गए। परन्तु भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने उस बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद की तीव्रता सीमा पार अपराधों और आतंकियों को बढ़ावा देकर ही संभव होती है। उन्होंने पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाया और कहा कि ऐसे कृत्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत ठहराया जाना चाहिए।
सियासी और रणनीतिक प्रभाव
ट्रंप के इस ताज़ा दावे ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। एक ओर अमेरिकी आमने-सामने संघर्षों की भूमिका को राहत देने वाला बताया, वहीं दूसरी ओर भारत ने अपनी स्पष्ट आपत्ति दर्ज की। अंतरराष्ट्रीय सैन्य एवं कूटनीतिक समीक्षकों का कहना है कि ट्रंप की कथित भूमिका की सत्यता की जांच होना जरुरी है, क्योंकि ऐसी स्थिति में एक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ऐसे खुलासे का मर्मक प्रश्न भी उठता है कि क्या उन्हें सशस्त्र सेवाओं या विदेश मंत्रालय से पहले से जानकारी थी, या यह सब चुनावी रणनीति का हिस्सा था?
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर छाया ट्रंप का बयान
ट्विटर और एक्स प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रंप की यह घोषणा तेजी से वायरल हो रही है। कुछ उपयोगकर्ता इसे अमेरिकी वर्चस्व की कल्पना करार दे रहे हैं, तो कई इसपर सवाल उठा रहे हैं कि क्या ट्रंप के पास भारत-पाकिस्तान संघर्ष जैसी संवेदनशील सूचना थी? अन्य सोशल मीडिया विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे दावे अक्सर वैश्विक नियंत्रण और स्पष्टीकरण की मांग करते हैं।
यह दावा सच हो या नहीं, लेकिन इसने एक बार फिर वैश्विक मीडिया की निगाहें भारत-पाकिस्तान क्षेत्र पर केंद्रित की हैं। ट्रंप की कथित भूमिका चाहे हकीकत हो या प्रचार, इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि कूटनीतिक संवाद में पूर्वाधिकारों के दायरे का पुनर्मूल्यांकन होना आवश्यक है। यदि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति किसी समय पर भारत-पाकिस्तान तनाव को रोकने में शामिल रहे, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संचार और सैन्य रणनीतियों पर भी पड़ेगा।
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