समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 10 अगस्त: असम जातीय परिषद (AJP) ने शनिवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए असमिया समुदाय को संकट में धकेल रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विभाजनकारी और साम्प्रदायिक राजनीति का सहारा लेकर राज्य की सामाजिक एकता को कमजोर कर रहे हैं।
गुवाहाटी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में AJP के अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई और महासचिव जगदीश भुइयां ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने से पहले किए गए किसी भी वादे को पूरा नहीं किया और अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए जनता का ध्यान भटकाने की रणनीति अपनाई।
‘भाजपा ने असम समझौते से किया विश्वासघात’
AJP नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार असम समझौते की शर्तों के अनुसार कार्य करने के बजाय विदेशियों के मुद्दे पर राजनीति कर रही है। गोगोई ने आरोप लगाया—
“बांग्लादेशियों के रूप में चिह्नित लोगों को सरकारी सहायता से पुनर्वासित किया जा रहा है, नए निर्वासित परिवारों को राज्य के भीतर ही बसाया जा रहा है, और घोषित विदेशी लोगों को सीमा पर ले जाकर कुछ घंटों में वापस लाया जा रहा है।”
पार्टी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने अब तक बांग्लादेश के साथ प्रत्यावर्तन संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू कर दिया, जिससे अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता का रास्ता मिल गया है।
‘वोट बैंक राजनीति और बढ़ता अवैध प्रवास’
AJP ने आरोप लगाया कि हिंदू बांग्लादेशियों के खिलाफ लंबित मामलों को विदेशी न्यायालयों से वापस लेने का फैसला भाजपा की वोट बैंक राजनीति का प्रमाण है। गोगोई और भुइयां ने मुख्यमंत्री के हालिया बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि असम में एक करोड़ से अधिक अवैध प्रवासी हैं।
AJP नेताओं ने सवाल उठाया—
“अगर भाजपा 10 साल से सत्ता में है, तो यह संख्या इतनी तेजी से कैसे बढ़ी? क्या सरकार खुद असमिया लोगों को अल्पसंख्यक बनाने की स्थिति नहीं पैदा कर रही?”
AJP की मांगें
पार्टी ने असम की जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाने की मांग की:
- असम समझौते की धारा 5 का पूर्ण कार्यान्वयन
- बांग्लादेश के साथ प्रत्यावर्तन संधि पर हस्ताक्षर
- राज्य की सीमाओं की सख्त सुरक्षा
- सीमा पार मवेशी तस्करी पर रोक
- NRC प्रक्रिया का पूरा करना
- असम समझौते की धारा 6 और न्यायमूर्ति (से.) बिप्लब कुमार शर्मा समिति की सिफारिशों का क्रियान्वयन
- असम में इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली की शुरुआत
- छह समुदायों को जनजातीय दर्जा प्रदान करना
AJP का चेतावनी भरा संदेश
AJP ने कहा कि अगर सरकार ने असमिया समुदाय की चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया, तो आने वाले वर्षों में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ेगी। पार्टी ने जनता से अपील की कि वे अपनी पहचान, अधिकार और भूमि की रक्षा के लिए एकजुट हों।
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