अखिलेश यादव और अनिरुद्धाचार्य के बीच वायरल वीडियो पर विवाद तेज

समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 17 जुलाई: सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो एक बार फिर सुर्खियों में है, जिसमें समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज के बीच एक संवाद देखा जा सकता है। यह वीडियो वर्ष 2023 का बताया जा रहा है, जब दोनों की मुलाकात आगरा से लौटते समय एक्सप्रेस-वे पर हुई थी।

वीडियो की शुरुआत में ‘शूद्र’ शब्द को लेकर चर्चा होती है, लेकिन बात जल्द ही भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर पहुंच जाती है। अखिलेश यादव कथावाचक से भगवान का नाम पूछते हैं, और जब उन्हें जवाब उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलता, तो वे कह देते हैं, “आज से आपका रास्ता अलग, हमारा रास्ता अलग।” यह बयान इंटरनेट पर वायरल हो गया और सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई।

अनिरुद्धाचार्य ने दिया सार्वजनिक जवाब

इस वीडियो पर अब अनिरुद्धाचार्य महाराज ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने अनुयायियों के सामने कहा कि सवाल पूछना बुरा नहीं है, लेकिन किसी उत्तर को लेकर नाराज़ होना अनुचित है। उनका कहना था, “भगवान के नाम अनंत हैं। सवाल पूछने वाले को भी सीखना चाहिए कि हर उत्तर उसके मन की संतुष्टि के लिए नहीं होता।”

उन्होंने अखिलेश यादव के बयान पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री जैसे पद पर रह चुके व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता कि वह किसी कथावाचक से इस तरह व्यवहार करे

‘राजा को प्रजा से प्रेम करना चाहिए’

अनिरुद्धाचार्य ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अखिलेश यादव का “रास्ता अलग” वाला बयान राजा और प्रजा के रिश्ते को कमजोर करने वाला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “अगर एक मां अपने बेटे से सवाल पूछे और बेटा जवाब न दे पाए, तो क्या वह कहेगी कि हमारा रिश्ता खत्म?” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “राजा को प्रजा से नफरत नहीं करनी चाहिए, बल्कि पुत्रवत स्नेह रखना चाहिए।

मुसलमानों के प्रति दोहरा रवैया?

कथावाचक ने अखिलेश यादव पर धार्मिक पक्षपात का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि यादव ने उन्हें तो अलग रास्ते की बात कही, लेकिन मुसलमानों से ऐसा नहीं कहते। उनका आरोप था कि राजनीतिक फायदे के लिए नेता समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटते हैं और समाज में एकता की बजाय दूरी बढ़ाते हैं।

राजनीति और धर्म पर नई बहस की तैयारी

भले ही यह वीडियो पुराना हो, लेकिन अनिरुद्धाचार्य की नई प्रतिक्रिया ने इसे फिर से चर्चा में ला दिया है। राजनीति और धर्म की जटिल परतें एक बार फिर उघड़ती नजर आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीति के साथ-साथ सामाजिक विमर्श में भी एक नया मोड़ ला सकता है।

 

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