समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, 6 अगस्त: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले ने राष्ट्रीय राजनीति को गरमा दिया है। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।
“जब वोट देने का अधिकार ही छीना जा रहा है तो हम कहां जाएं?”
अखिलेश यादव ने कहा, “लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब हर नागरिक को वोट डालने का अधिकार मिले। लेकिन जब यही अधिकार छीना जा रहा हो, तो हम आवाज कहां उठाएं? ये मुद्दा सिर्फ बिहार का नहीं, बल्कि देशभर के मतदाताओं से जुड़ा है।”
#WATCH दिल्ली: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, "लोकतंत्र तब मजबूत होगा जब सबका वोट डालने का जो अधिकार है, वो मिलेगा। जब वो ही अधिकार छीना जा रहा है तो हम कहां आवाज उठाएं?…सरकार को सुनना चाहिए और उन अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो लगातार वोटर लिस्ट के साथ खिलवाड़… pic.twitter.com/TaBnOohRtR
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 6, 2025
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों द्वारा मतदाता सूची से छेड़छाड़ की जा रही है और सरकार को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
“SIR पर हो खुली बहस और जांच”
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मतदाता नाम हटाने का मामला सामने आया है। ऐसे में SIR की प्रक्रिया, उसकी पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर व्यापक बहस होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “वोटर लिस्ट में हेरफेर का मतलब है लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार।” अखिलेश का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले पर 12-13 अगस्त को सुनवाई करने जा रही है।
विपक्षी एकता को मिल सकता है मुद्दा
SIR विवाद को लेकर अब यह मुद्दा विपक्षी दलों के लिए एक साझा राजनीतिक एजेंडा बनता दिख रहा है। पहले ही एनजीओ ADR ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है और अब अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेताओं का समर्थन मिलने से सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस मुद्दे को सही तरीके से उठाया गया, तो यह 2026 लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
सुप्रीम कोर्ट भी सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से 9 अगस्त तक हटाए गए 65 लाख मतदाताओं की सूची और कारण मांगे हैं और स्पष्ट किया है कि अगर बड़े पैमाने पर गैरकानूनी रूप से नाम हटाए गए, तो कोर्ट हस्तक्षेप करने से पीछे नहीं हटेगा।
अखिलेश यादव द्वारा SIR पर चर्चा की मांग और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने पर चिंता, यह संकेत देती है कि यह विषय अब सिर्फ चुनावी प्रक्रिया का तकनीकी मामला नहीं रह गया, बल्कि यह जन अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि आगे इस मुद्दे का क्या रुख होगा।
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