अखिलेश यादव के दीयों और क्रिसमस बयान पर सियासी बवाल, BJP नेताओं ने साधा निशाना

समग्र समाचार सेवा
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, 19 अक्टूबर: समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। धनतेरस (18 अक्टूबर) के दिन दिए गए अपने बयान में अखिलेश यादव ने दीयों और मोमबत्तियों को फिजूलखर्ची बताया और क्रिसमस के उदाहरण से सिख लेने की सलाह दे डाली। उनके इस बयान के बाद बीजेपी नेताओं ने उन्हें जोरदार घेरा और इसे हिंदू विरोधी बयान करार दिया।

अखिलेश यादव ने कहा, “मैं कोई सुझाव नहीं देना चाहता, लेकिन मैं भगवान राम के नाम पर सुझाव जरूर दूंगा। दुनिया में क्रिसमस के समय पूरे शहर जगमगा जाते हैं। उन्हीं से सिख लो, बस। क्यों खर्चा करना दीयों का, मोमबत्ती का, बार-बार। हम इस सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं? इस सरकार को हटाइए, बहुत सुंदर रोशनी कराएंगे हम लोग।”

उनके इस बयान पर बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “देश के लोग दीपावली पर दीप जला रहे हैं और कुछ लोगों के दिल जल रहे हैं। हर त्योहार का अपना महत्व होता है। हमारे देश के लिए दीपावली का बहुत बड़ा महत्व है। देश की संस्कृति और संस्कार इतिहास से जुड़ा हुआ है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” उन्होंने इसे सनातन विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी अखिलेश यादव पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जिन लोगों का राजनीतिक इतिहास अयोध्या को अंधकार में रखने का है, राम मंदिर मामले को लटकाने और अटकाने का है, वही लोग आज अयोध्या में दीपों से सजावट पर विरोध कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जिन्होंने सनातन को बीमारी कहा और राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को नाच-गाना कहा। आज जब छोटे-छोटे लोगों ने दीप जलाकर अपनी आमदनी बढ़ाई है, उसका विरोध भी यही लोग कर रहे हैं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सपा अध्यक्ष का यह बयान चुनावी माहौल में सियासी रंग भरने के लिए दिया गया हो सकता है। हालांकि बीजेपी इसे धर्म और सांस्कृतिक भावनाओं का अपमान मान रही है। दीपावली जैसे त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं और देशभर में इसका उल्लास मनाया जाता है।

सपा और बीजेपी के बीच यह बयानबाजी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तनाव को और बढ़ा सकती है। यह विवाद यह भी दिखाता है कि चुनावी रणनीतियों में धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों का महत्वपूर्ण स्थान है और इसका असर मतदाताओं के निर्णय पर पड़ सकता है।

 

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