काशी राजपरिवार संपत्ति विवाद

मिश्रित संपत्ति विवाद—सिविल कोर्ट में होगी काशी राजपरिवार की सुनवाई

 

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया—कृषि व गैर-कृषि दोनों संपत्तियां होने पर मामला सिविल कोर्ट में सुनवाई योग्य।
  • कोर्ट ने कुमारी विष्णुप्रिया की प्रथम अपील (एफएएफओ) और डॉ. अनंत नारायण सिंह की सिविल रिवीजन याचिका खारिज की।
  • याचिका में काशी राजपरिवार की संपत्ति के एक-चौथाई हिस्से के बंटवारे की मांग थी।
  • प्रतिवादी ने तर्क दिया—ज्यादातर संपत्तियां कृषि भूमि हैं, इसलिए मामला राजस्व न्यायालय में जाना चाहिए।
  • हाई कोर्ट ने माना—भवन, मकान और आबादी घोषित भूमि भी होने से विवाद सिर्फ कृषि भूमि तक सीमित नहीं।

समग्र समाचार सेवा

प्रयागराज, 7 अगस्त : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने काशी राजपरिवार की मिलीजुली संपत्तियों के बंटवारे पर बड़ा फैसला दिया है।

कोर्ट ने कहा, अगर विवादित संपत्तियों में कृषि भूमि के साथ-साथ भवन, मकान और आबादी घोषित भूमि भी शामिल हैं, तो पूरे मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में हो सकती है।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए एफएएफओ और सिविल रिवीजन दोनों याचिकाएं खारिज कर दीं।
याचिकाकर्ता की ओर से संपत्ति बंटवारे और हिस्सेदारी की मांग थी, वहीं प्रतिवादी ने राजस्व कोर्ट में सुनवाई की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने साफ किया—मिश्रित संपत्तियों के मामलों में सिविल कोर्ट ही सक्षम है।

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