अमित शाह ने CHARUSAT के 15वें दीक्षांत समारोह में युवाओं को दिया राष्ट्रनिर्माण का मंत्र
2047 तक भारत को विश्व में सर्वप्रथम बनाने का संकल्प युवाओं का हो: गृह मंत्री
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्षों में सतत विकास की परंपरा स्थापित
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CHARUSAT के 15वें दीक्षांत समारोह में 2129 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
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‘चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा बेकार है’ सरदार पटेल का संदेश दोहराया
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युवाओं से समाज और देश को देने की भावना विकसित करने का आह्वान
समग्र समाचार सेवा
आणंद (गुजरात), 14 जनवरी: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुजरात के आणंद जिले में चरोतर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CHARUSAT) के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 2129 डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं, जिनमें 45 गोल्ड मेडलिस्ट और 38 पीएचडी उपाधि प्राप्त छात्र शामिल हैं।
शिक्षा का उद्देश्य: चरित्र और राष्ट्रभाव
गृह मंत्री ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल का कथन “चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा बेकार है” हर नागरिक के जीवन का मूल वाक्य होना चाहिए। केवल डिग्री या कौशल नहीं, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और राष्ट्रभाव शिक्षा का सार है।
‘मैं क्या बनूंगा’ से आगे ‘मैं क्या दूंगा’
अमित शाह ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने करियर के साथ यह भी तय करें कि वे समाज और देश को क्या योगदान देंगे। उद्देश्य-निर्धारण से ही जीवन में परिश्रम और उपलब्धि का मार्ग खुलता है।
अमृतकाल और भारत की आर्थिक छलांग
उन्होंने कहा कि आज का समय अमृतकाल का है—आजादी के 75 से 100 वर्ष का यह कालखंड संकल्प और निर्माण का है। 2014 में 11वें स्थान की अर्थव्यवस्था से भारत आज चौथे स्थान पर पहुँचा है और 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इससे युवाओं के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अपार अवसर बने हैं।
11 वर्षों में उच्च शिक्षा में मूलभूत परिवर्तन
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में उच्च शिक्षा में सीटों, कोर्स डिज़ाइन और अवसरों में बड़ा विस्तार हुआ है—विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों और एमबीबीएस/पीजी सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह दूरदर्शी योजना युवाओं के भविष्य को सशक्त बना रही है।
2047 के लिए छह सूत्र
उन्होंने युवाओं को छह मंत्र दिए—
- बड़े सपने देखें, असफलता से न डरें
- तकनीक का उपयोग समाज और देश के लिए करें
- जीवन भर सीखते रहें
- ज्ञान में शॉर्टकट न अपनाएँ
- निरंतर परिश्रम करें
- देशहित को सर्वोपरि रखें
चरोतर की भूमि और सहकारिता की शक्ति
अमित शाह ने चरोतर क्षेत्र की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी भूमि ने अमूल जैसे वैश्विक सहकारी मॉडल को जन्म दिया, जो आज विश्व की अग्रणी सहकारी संस्था है।
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