अमित शाह ने पेश किया नशा मुक्त भारत का रोडमैप

पणजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने नशीली दवाओं की तस्करी के खिलाफ सरकार की बड़ी रणनीतियों का खुलासा किया।

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पणजी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वर्ष 2029 तक भारत को पूरी तरह ‘नशा मुक्त’ बनाने का रोडमैप साझा किया।
  • उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासनकाल की तुलना में मोदी सरकार के दौरान जब्त किए गए ड्रग्स की मात्रा और उसकी कीमत में भारी बढ़ोतरी हुई है।
  • गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य देश में नशीली दवाओं की तस्करी को पूरी तरह रोकना और युवाओं को इस खतरे से बचाना है।

पणजी (गोवा), 7 सितंबर: देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थों के दलदल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने अपने अभियानों को और तेज कर दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गोवा के पणजी में एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वर्ष 2029 तक भारत को पूरी तरह ‘नशा मुक्त’ बनाने के लिए एक व्यापक और समयबद्ध रोडमैप देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि न केवल मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है, बल्कि इसके वित्तीय तंत्र (नारको-टेरर) को भी पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पकड़े गए अवैध पदार्थों और उनके विनिष्टीकरण के आंकड़े भी साझा किए।

ड्रग्स जब्ती के आंकड़ों में भारी बढ़ोतरी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गृह मंत्री ने पिछले दशकों के आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि किस प्रकार वर्तमान सरकार ने इस दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के कांग्रेस शासनकाल के दौरान लगभग 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किया गया था, जिसका अनुमानित मूल्य 400 करोड़ रुपये था। इसके विपरीत, वर्ष 2014 से 2026 के बीच चलाए गए कड़े अभियानों के तहत 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक ड्रग्स पकड़ा गया है, जिसकी कुल कीमत लगभग 1,89,000 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, जब्त किए गए मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण (डिस्ट्रक्शन) के मामलों में भी अभूतपूर्व तेजी लाई गई है ताकि यह सामग्री किसी भी स्थिति में दोबारा बाजार तक न पहुंच सके।

चार स्तंभों पर आधारित होगा नया विजन डॉक्यूमेंट

नशा मुक्त भारत के इस नए विजन को धरातल पर उतारने के लिए गृह मंत्रालय ने चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित कार्य योजना तैयार की है। इसमें इंटेलिजेंस और ऑपरेशन आधारित एनफोर्समेंट, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर कड़ा नियंत्रण, डिमांड व हार्म रिडक्शन (मांग और नुकसान को कम करना), तथा क्षमता निर्माण और समन्वय शामिल हैं। सरकार ने अगले तीन वर्षों में देश भर में 100 गुप्त प्रयोगशालाओं (Labs) को ध्वस्त करने, नारकोटिक्स से जुड़े 100 भगोड़ों को वापस लाने और शिक्षण संस्थानों तथा युवाओं को इस अभियान से सीधे जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही, ‘मानस हेल्पलाइन’ और नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या को भी व्यापक स्तर पर बढ़ाया जा रहा है।

युवाओं को बचाने के लिए समाज का सहयोग जरूरी

गृह मंत्री अमित शाह ने मीडिया और आम जनता से अपील करते हुए कहा कि नशीली दवाओं के खिलाफ यह लड़ाई किसी एक पार्टी या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि भारत की सीमाओं से न तो देश के भीतर एक ग्राम ड्रग आने दिया जाएगा और न ही यहां से बाहर जाने दिया जाएगा। इस दिशा में राज्य पुलिस, एएनटीएफ (ANTF) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाया जा रहा है। सरकार का यह संकल्प है कि वर्ष 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए देश की युवा शक्ति को पूरी तरह स्वस्थ, सुरक्षित और नशा मुक्त बनाया जाए।

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