अमित शाह ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर स्वदेशी अपनाने का आह्वान किया

केंद्रीय गृह मंत्री बोले – अब समय आ गया है कि हम वंदे मातरम से प्रेरणा लेकर महान भारत के निर्माण का संकल्प लें।

  • ब्रिटिश शासन के दौर में वंदे मातरम ने जगाई थी राष्ट्रीय चेतना।
  • अमित शाह ने कहा, कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम कहते हुए प्राण त्याग दिए।
  • नागरिकों से स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान।
  • 2047 तक महान भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 नवंबर: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि ब्रिटिश शासन का युग जब शुरू हुआ, तब प्रथम स्वतंत्रता संग्राम असफल हो चुका था और देशभर में लोगों के मन में यह संशय था कि क्या हमारी राष्ट्रीय चेतना फिर कभी जागृत हो पाएगी। उसी समय बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम जैसे महान राष्ट्रीय गीत की रचना की, जिसने भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की पहली घोषणा की।

अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम यह स्पष्ट करता है कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक विचार और संस्कृति है जो सभी भारतीयों को एक सूत्र में पिरोती है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा सांस्कृतिक राष्ट्रवाद पर जोर दिया है और इस विचार की चेतना निश्चित रूप से वंदे मातरम से ही प्रेरित रही है।

उन्होंने बताया कि अनेक स्वतंत्रता सेनानी फांसी के तख्ते पर वंदे मातरम कहते हुए हँसते-हँसते शहीद हुए। शाह ने कहा, “अब वह समय आ गया है जब हमें उन महान आत्माओं के सपनों का भारत बनाना है।” उन्होंने कहा कि आज से लेकर 2047 तक का कालखंड वंदे मातरम से प्रेरणा लेकर महान भारत निर्माण का समय है।

गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी आज दिल्ली में वंदे मातरम के सामूहिक गायन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक क्षण पर हम सबने संकल्प लिया है कि वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ को स्वदेशी को समर्पित किया जाए।

शाह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण स्वदेशी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर स्वदेशी अपनाने का संकल्प लें और भारत माता की सेवा में पुनः अपना जीवन समर्पित करें, ताकि 2047 तक हम सब मिलकर महान भारत का निर्माण कर सकें।

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