आंध्र प्रदेश: पादरी प्रवीण की मौत पर विवाद, शराब पीकर गाड़ी चलाने से हादसा या साजिश? सरकार ने दिए जांच के आदेश

विशाखापत्तनम, 4 अप्रैल — आंध्र प्रदेश में पादरी प्रवीण की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने एक नया राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया है। जहां पुलिस शुरूआती जांच में इसे शराब के नशे में तेज़ रफ्तार से गाड़ी चलाने के कारण हुआ सड़क हादसा बता रही है, वहीं ईसाई समुदाय से जुड़े संगठनों ने इसे ‘षड्यंत्र’ करार दिया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार रात विशाखापत्तनम के बाहरी इलाके में पादरी प्रवीण की कार एक डिवाइडर से टकरा गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कार में मौजूद कुछ दस्तावेज़ों और घटनास्थल पर मिले शराब की बोतल के आधार पर पुलिस ने आशंका जताई कि चालक नशे में था और तेज़ रफ्तार के कारण वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया।

हालांकि, पादरी प्रवीण के समर्थकों और कुछ ईसाई संगठनों ने इस थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रवीण एक संयमी और ज़िम्मेदार धार्मिक नेता थे, जो शराब नहीं पीते थे। उनका कहना है कि प्रवीण हाल के दिनों में कुछ विवादास्पद मुद्दों पर मुखर थे और उन्होंने कुछ स्थानीय तत्वों की गतिविधियों की आलोचना की थी।

प्रवीण के करीबी सहयोगियों का आरोप है कि यह हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या हो सकती है। उन्होंने दावा किया है कि हादसे से पहले पादरी को धमकियाँ मिली थीं, जिसकी शिकायत उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से भी की थी। हालांकि पुलिस को ऐसी किसी लिखित शिकायत की पुष्टि नहीं हुई है।

विवाद बढ़ता देख राज्य सरकार ने इस मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “पादरी प्रवीण की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी तरह के संदेह को दूर करने और सच्चाई सामने लाने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।”

इस घटना ने राज्य में धार्मिक संगठनों के बीच असंतोष को हवा दी है। कुछ समूहों ने विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च की घोषणा की है। प्रशासन ने किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक अशांति से बचने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी है और शांति बनाए रखने की अपील की है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। डीसीपी (ट्रैफिक) ने बताया कि, “हम दुर्घटना स्थल से मिले सबूतों की फॉरेंसिक जांच करवा रहे हैं। दुर्घटना का सही कारण रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। अभी किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।”

पादरी प्रवीण की मौत ने आंध्र प्रदेश में न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को झकझोरा है, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है — क्या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था या वाकई इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है?

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