ट्रंप का अल्टीमेटम लेकर ईरान पहुंचे आसिम मुनीर को दुकारा
ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को खरी-खरी सुनाई, कहा- अपना संदेश लेकर फ्लाइट से वापस लौट जाओ।
- पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ट्रंप का अल्टीमेटम लेकर ईरान गए थे।
- ईरानी सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने मुनीर का बेहद रूखा स्वागत किया।
- ईरान ने स्पष्ट किया कि जब तक शर्तें पूरी नहीं होतीं, बातचीत नहीं होगी।
समग्र समाचार सेवा
तेहरान / इस्लामाबाद, 23 अक्तूबर: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) का एक कड़ा अल्टीमेटम लेकर ईरान की यात्रा पर पहुंचे पाकिस्तानी सेना प्रमुख (Army Chief) जनरल आसिम मुनीर को तेहरान में भारी बेरुखी और अपमान का सामना करना पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की नई सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसेन रेजाई (Mohsen Rezai) ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख का बेहद रूखा स्वागत किया और उन्हें दो टूक शब्दों में कह दिया कि वे अपना धमकी भरा संदेश लेकर अपनी फ्लाइट से तुरंत वापस लौट जाएं। इस घटना ने पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों में भूचाल ला दिया है।
परमाणु कार्यक्रम छोड़ने की चेतावनी लेकर पहुंचे थे मुनीर
लेबनानी समाचार पत्र ‘अल-अखबार’ और ‘ईरान इंटरनेशनल’ में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर अमेरिका के दूत के रूप में या अमेरिकी हितों के संवाहक बनकर ईरान पहुंचे थे। उनका मुख्य उद्देश्य तेहरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की वह अंतिम चेतावनी (Ultimatum) सौंपना था, जिसमें ईरान से अपने पूरे परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से छोड़ने और यूरेनियम संवर्द्धन बंद करने की मांग की गई थी।
मुनीर ने ईरानी अधिकारियों के सामने दलील दी कि तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रमों पर अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत में अधिक लचीला रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन की शर्तों को नहीं माना गया, तो ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकानों (विशेषकर ‘पिकएक्स माउंटेन’ साइट सहित) पर बड़े पैमाने पर विनाशकारी सैन्य हमले किए जा सकते हैं।
मोहसेन रेजाई का कड़ा रुख: ‘वापस अपनी फ्लाइट में जाओ’
जब आसिम मुनीर यह अमेरिकी अल्टीमेटम लेकर ईरानी सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहसेन रेजाई के सामने पहुंचे, तो रेजाई का तेवर बेहद कड़ा और असहज करने वाला था। वीडियो और कूटनीतिक मुलाकातों के दौरान दोनों के बीच किसी भी प्रकार की आत्मीयता या गर्मजोशी नहीं दिखाई दी। रेजाई ने मुनीर को दो टूक लहजे में दुत्कारते हुए स्पष्ट कर दिया कि ईरान पर किसी भी प्रकार का दबाव काम नहीं करेगा।
ईरानी पक्ष ने साफ कर दिया कि ईरान से संवर्धित परमाणु सामग्री का एक कण भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। इसके अलावा, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ़ और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के साथ हुई बैठकों में भी ईरानी पक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि उनके पास अमेरिका या उसके मध्यस्थों को देने के लिए अब कहने को कुछ नया नहीं है। ईरान ने स्पष्ट शर्त रखी है कि जब तक अमेरिका उसकी पूर्व निर्धारित सात शर्तों को मानकर आपसी भरोसा कायम नहीं करता, तब तक किसी भी स्तर की बातचीत संभव नहीं है।
पाकिस्तान की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
पाकिस्तान के सेना प्रमुख द्वारा इस प्रकार अमेरिका का दूत बनकर ईरान जैसे पड़ोसी और मुस्लिम देश में जाकर धमकी देना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान एक बार फिर पश्चिमी देशों और अमेरिका के इशारे पर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने का जरिया बन रहा है। ईरान ने जिस प्रकार पाकिस्तानी सेना प्रमुख को तवज्जो न देकर बैरंग लौटने का संदेश दिया है, उससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की साख को एक और बड़ा झटका लगा है। तेहरान ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी बाहरी ताकत या उसके पिट्ठू की चेतावनियों से डरने वाला नहीं है।
निष्कर्ष
जनरल आसिम मुनीर की यह ईरान यात्रा पूरी तरह से विफल साबित हुई है। एक तरफ जहां अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों का दबाव बना रहा है, वहीं ईरान ने अपनी संप्रभुता और परमाणु नीति को लेकर दो टूक रुख अपनाकर यह दिखा दिया है कि वह किसी भी अल्टीमेटम के आगे झुकने वाला नहीं है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया में संभावित संघर्ष के बादलों को और अधिक घना कर दिया है।
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