समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 27 अगस्त: असम भाजपा 29 अगस्त को एक भव्य “पंचायत सम्मेलन” आयोजित करने जा रही है, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य आकर्षण होंगे। इसे 2026 विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी शंखनाद माना जा रहा है। भाजपा के प्रदेश महासचिव पल्लब लोचन दास ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।
सम्मेलन का स्वरूप और भागीदारी
इस सम्मेलन में लगभग 20,000 निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी अपेक्षित है।
- इनमें भाजपा के 16,671 पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- असम गण परिषद (AGP) के 1,500 से अधिक प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
- राभा हसोंग जोठा संघर्ष समिति और जनशक्ति पार्टी के नेता भी हिस्सा लेंगे।
इसके अलावा, राज्य की विभिन्न स्वायत्त परिषदों जैसे कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद और डिमा हसाओ स्वायत्त परिषद के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में भाग लेंगे।
हालांकि, आगामी BTC (बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल) चुनावों को ध्यान में रखते हुए, BTR क्षेत्र से प्रतिनिधि शामिल नहीं होंगे।
अमित शाह का कार्यक्रम
29 अगस्त को अमित शाह का दिनभर का गुवाहाटी दौरा बेहद व्यस्त रहेगा।
- वे सबसे पहले राज भवन की नई इमारत का उद्घाटन करेंगे।
- इसके बाद कानापारा स्थित पशु चिकित्सा कॉलेज मैदान में पंचायत सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
- शाह असम के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री गोलाप बोरबोरा की जन्म शताब्दी समारोह का भी उद्घाटन करेंगे।
भाजपा की रणनीति
भाजपा ने इस सम्मेलन को “चुनावी मिशन 2026” का प्रारंभिक मंच बताया है। पार्टी महासचिव दास ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए ग्राम पंचायत स्तर से लेकर विधानसभा तक संगठन को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जाएगा।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा और सहयोगी दलों का गठबंधन राज्य में आगामी चुनावों में स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगा।
राजनीतिक महत्व
विशेषज्ञ मानते हैं कि पंचायत सम्मेलन न केवल ग्रामीण इलाकों में भाजपा की पकड़ मजबूत करने का प्रयास है, बल्कि यह विपक्ष को यह संदेश देने का भी अवसर है कि 2026 के चुनाव के लिए भाजपा पहले से तैयार है।
पार्टी का फोकस पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय कर जमीनी स्तर पर संगठन को चुनावी मोड में लाना है।
असम भाजपा का पंचायत सम्मेलन केवल एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि 2026 विधानसभा चुनावों का औपचारिक शंखनाद है। अमित शाह की मौजूदगी इस आयोजन को और अधिक राजनीतिक वजन देती है। अब देखना होगा कि भाजपा का यह ग्रामीण संदेश कितना प्रभावी साबित होता है।
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