बसावा इंटरनेशनल स्कूल, द्वारका ने प्रो. एम. एम. गोयल के मार्गदर्शन में शिक्षकों के लिए “बदलते आर्थिक परिदृश्य में शिक्षकों हेतु उत्कृष्टता मॉडल” विषय पर कार्यशाला आयोजित की

समग्र समाचार सेवा

द्वारका, नई दिल्ली, 30 अगस्त: – “शिक्षाप्रद शिक्षक होने हेतु हमें सहानुभूति के साथ छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझना होगा” I  ये शब्द  प्रो.  मदन मोहन गोयल. तीन बार कुलपति, नीडोनोमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक  एवं कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से  सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ने कहे । उन्होंने नई दिल्ली के द्वारका स्थित बसावा इंटरनेशनल स्कूल के शिक्षकों के लिए “बदलते आर्थिक परिदृश्य में शिक्षकों हेतु  उत्कृष्टता मॉडल” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया ।   सुश्री पूर्णिमा अंबली महाप्रबंधक ने समारोह की अध्यक्षता की। सुश्री गुंजन मेहरोत्रा ​​प्रिंसिपल ने स्वागत भाषण दिया और प्रो, एम.एम. गोयल की उपलब्धियों पर एक प्रशस्ति पत्र प्रस्तुत किया।

प्रो. गोयल ने कहा कि सीखने को अंतिम लक्ष्य बनाने हेतु शिक्षकों की भूमिका को समृद्ध करके शिक्षण से अधिक सीखने को प्राथमिकता दें।

प्रो. गोयल ने  बताया कि  शिक्षकों को छात्रों को सक्रिय रूप से उत्तर खोजने और रचनात्मकता, नवीनता और आलोचनात्मक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करके अन्वेषण के सूत्रधार बनना चाहिए।

शिक्षा के वास्तविक मूल्य को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है, जो केवल किसी व्यक्ति को आजीविका कमाने में सक्षम बनाने से परे जाती है (अनपढ़ से अन्नपढ़ तक)। शिक्षा की अर्थव्यवस्था ने, इसके मूल्य को बढ़ाने के बजाय, इसके वास्तविक मूल्य को कम कर दिया है, ऐसा कहना है प्रो. गोयल का, जो शिक्षकों के चार पीढ़ियों वाले परिवार से हैं और शिक्षा के प्रति समर्पित हैं।

पूर्व वीसी डॉ. गोयल ने बताया कि शिक्षण को केवल एक पेशेवर कार्य के रूप में पुनः स्थापित करने  हेतु हमें ईमानदार, मानवतावादी और मेहनती शिक्षकों की आवश्यकता है जो वास्तविक शिक्षा प्रदान करें, जिसमें हाथों, दिमाग और दिलों (3H) का उचित, उत्पादक और व्यावहारिक (3P) उपयोग शामिल हो।

प्रो. गोयल ने कहा  कि  हम नीडोनोमिक्स के सामान्य ज्ञान दृष्टिकोण के साथ सामाजिक-आर्थिक विकास में सक्रिय योगदान देने हेतु   नैतिकता, समृद्धि, जीत और सशक्तिकरण प्राप्त कर सकते हैं।

प्रो. एम.एम. गोयल का मानना है कि ग्रीडोनॉमिक्स (लालच आधारित अर्थशास्त्र) से उत्पन्न समस्याओं का हल केवल नीडोनॉमिक्स के माध्यम से ही संभव है।

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