रेल नेटवर्क का मेगा विस्तार: 5 साल में 48 बड़े स्टेशनों की ट्रेन क्षमता दोगुनी करेगी भारतीय रेल

बड़े टर्मिनलों के साथ आसपास के स्टेशनों पर भी समानांतर विकास कार्य होगा

  • अगले 5 साल में 48 प्रमुख रेलवे स्टेशनों की ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाई जाएगी
  • प्लेटफॉर्म, सिग्नलिंग और मल्टी-ट्रैकिंग के जरिए ऑपरेशनल दबाव कम होगा
  • बड़े टर्मिनलों के साथ आसपास के स्टेशनों का भी समानांतर विकास होगा
  • रेलवे बोर्ड ने जोनल रेलों से स्पष्ट टाइमलाइन और नतीजा-आधारित प्लान मांगा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 27 दिसंबर: भारतीय रेलवे ने देश के रेल नेटवर्क को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे अगले पाँच वर्षों में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई समेत देश के 48 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों को संभालने की क्षमता दोगुनी करने की योजना पर काम कर रहा है। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

48 बड़े शहरों के स्टेशन होंगे अपग्रेड

रेलवे के अनुसार, जिन शहरों में स्टेशन क्षमता बढ़ाने की योजना है, उनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, पटना, लखनऊ, चंडीगढ़, जयपुर, भोपाल, गुवाहाटी, वाराणसी, आगरा, पुरी, कोचीन, कोयंबटूर, वडोदरा, सूरत, अमृतसर, लुधियाना, विशाखापट्टनम, तिरूपति, विजयवाड़ा और मैसूर जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इन स्टेशनों पर बढ़ते यात्री और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

प्लेटफॉर्म, पिट लाइन और नए टर्मिनल पर जोर

स्टेशनों की ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर बदलाव किए जाएंगे। इसमें मौजूदा टर्मिनलों पर नए प्लेटफॉर्म जोड़ना, स्टेब्लिंग लाइनें, पिट लाइनें और पर्याप्त शंटिंग सुविधाओं का विकास शामिल है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों और उनके आसपास नए टर्मिनल की पहचान कर निर्माण भी किया जाएगा।

सिग्नलिंग अपग्रेड और मल्टी-ट्रैकिंग से बढ़ेगी क्षमता

बयान में कहा गया है कि रखरखाव सुविधाओं के विस्तार पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स, सिग्नलिंग अपग्रेडेशन, सेक्शनल क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी-ट्रैकिंग और ट्रैफिक सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे ज्यादा ट्रेनों का संचालन सुचारु रूप से हो सके।

आसपास के स्टेशनों पर भी होगा समानांतर विकास

रेलवे ने साफ किया है कि केवल मुख्य टर्मिनल ही नहीं, बल्कि उनके आसपास के स्टेशनों पर भी समानांतर कार्य किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, पुणे स्टेशन की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हडपसर, खडकी और आलंदी स्टेशनों पर भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि ट्रैफिक का संतुलन बना रहे।

2030 तक लक्ष्य, काम तीन चरणों में

रेलवे के अनुसार, स्टेशनों की क्षमता दोगुनी करने का लक्ष्य वर्ष 2030 तक रखा गया है। हालांकि अगले पांच साल में चरणबद्ध तरीके से काम शुरू कर दिया जाएगा। परियोजनाओं को तत्काल, शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैटेगरी में बांटा जाएगा, ताकि क्षमता बढ़ने का लाभ जल्दी मिल सके।

रेलवे बोर्ड ने मांगी स्पष्ट टाइमलाइन

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और सीईओ सतीश कुमार ने सभी जोनल रेलवे के जनरल मैनेजरों को पत्र लिखकर स्पष्ट और नतीजा-आधारित प्लान मांगा है। उन्होंने कहा कि हर डिवीजन को ट्रेन हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने का ठोस रोडमैप तैयार करना होगा, जिससे टर्मिनल, स्टेशन और यार्ड से जुड़ी ऑपरेशनल दिक्कतों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

Comments are closed.