सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को बड़ा झटका: 25,000 शिक्षकों की नियुक्ति रद्द, वापस करना होगा वेतन

समग्र समाचार सेवा
कोलकाता,3 अप्रैल।
पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार द्वारा की गई 25,000 शिक्षकों की नियुक्तियों को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यही नहीं, इन शिक्षकों को अब अपने कार्यकाल के दौरान प्राप्त वेतन भी वापस करना होगा। इस फैसले से बंगाल की शिक्षा प्रणाली पर बड़ा असर पड़ सकता है और सरकार को गंभीर प्रशासनिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

यह विवाद राज्य स्तरीय शिक्षक भर्ती प्रक्रिया (SSC भर्ती घोटाला) से जुड़ा है। आरोप था कि 2014-16 के दौरान पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) द्वारा भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं।

भ्रष्टाचार के आरोप: बिना मेरिट लिस्ट और पारदर्शी प्रक्रिया के हजारों शिक्षकों को नियुक्त कर दिया गया।
फर्जी नियुक्ति पत्र: कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि उन्हें उचित तरीके से मौका नहीं दिया गया।
CBI जांच का आदेश: हाईकोर्ट ने इस घोटाले की जांच के लिए CBI को आदेश दिया था, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और भ्रष्टाचार हुआ।

25,000 नियुक्तियां अवैध करार दी गईं।
 शिक्षकों को मिले वेतन की पूरी राशि लौटानी होगी।
नयी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चलाने के निर्देश दिए गए।

यह फैसला ममता बनर्जी सरकार के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर था, और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

सरकार की साख को बड़ा नुकसान – यह फैसला प्रशासनिक नाकामी को उजागर करता है।
नवीन नियुक्तियों की चुनौती – शिक्षकों की कमी से स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो सकती है।
आर्थिक संकट – सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा क्योंकि हजारों लोगों से वेतन वापस लेना आसान नहीं होगा।

बंगाल में विपक्षी दलों बीजेपी और कांग्रेस ने इसे सरकार की “भ्रष्टाचार की हार” बताया है। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह ममता सरकार की “नौकरी बेचने की राजनीति” का पर्दाफाश है।

वहीं, शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है और कहा कि “इससे कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।” कई शिक्षकों ने यह भी तर्क दिया कि उन्हें उचित प्रक्रिया से भर्ती किया गया था, और वे अब कानूनी मदद लेने की तैयारी में हैं।

अब सभी की नजरें ममता सरकार पर हैं कि वह क्या कोई पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी या नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगी। सरकार के लिए यह फैसला कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

क्या बंगाल की शिक्षा व्यवस्था इस फैसले से उबर पाएगी? या सरकार किसी नए कदम के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

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