GST में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 5% और 18% स्लैब, कांग्रेस ने राहुल गांधी के पुराने ट्वीट दिखाकर साधा निशाना

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 4 सितंबर: भारत सरकार ने हाल ही में जीएसटी (GST) के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरे देश में जीएसटी की दरें केवल 5% और 18% रह जाएंगी। 12% और 28% के टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया गया है। ये नए नियम 22 सितंबर से लागू हो जाएंगे। सरकार का दावा है कि इस फैसले से आम जनता और छोटे कारोबारियों को टैक्स का बोझ कम होगा और व्यापार करना आसान होगा।

कांग्रेस का पलटवार: “8 साल बाद हुई समझ”

सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर अपने पुराने तीर फिर से चलाने शुरू कर दिए। कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी के 2016 और 2017 के ट्वीट रिपोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी को अपनी गलती का एहसास करने में पूरे 8 साल लग गए।

राहुल गांधी ने 2017 के एक ट्वीट में जीएसटी को “गब्बर सिंह टैक्स” बताते हुए कहा था कि देश को एक सरल और समझने योग्य जीएसटी चाहिए। उन्होंने लिखा था कि कांग्रेस 28% स्लैब खत्म करने और टैक्स दर को 18% के CAP तक सीमित करने के लिए लगातार लड़ाई लड़ेगी।

2016 के एक अन्य ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा था कि जीएसटी की दर 18% रखना ही सभी वर्गों के लिए हितकारी होगा।

चिदंबरम और जयराम रमेश का हमला

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी ने 8 साल तक मध्यम वर्ग और गरीबों को टैक्स के दबाव में रखा। उनका आरोप था कि जब कांग्रेस ने जीएसटी की खामियों की ओर इशारा किया था, तब बीजेपी ने उसे अनदेखा कर दिया।

दूसरी ओर, जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री पहले ही जीएसटी दर घटाने का संकेत दे चुके थे, तो क्या अब जीएसटी परिषद केवल औपचारिकता रह गई है? उन्होंने यह भी कहा कि यह टैक्स सिस्टम ‘गुड एंड सिंपल’ नहीं, बल्कि विकास में बाधा बन गया।

पवन खेड़ा का तंज

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी शुरू से ही दो टैक्स स्लैब की बात कर रहे थे। उन्होंने तंज कसा कि बीजेपी को यह बात समझने में 9 साल लग गए, जो या तो उनकी समझदारी की कमी है या फिर अहंकार का परिणाम।

नए जीएसटी नियमों का असर

सरकार द्वारा किए गए इस बड़े बदलाव से अब देशभर में केवल दो टैक्स दरें लागू होंगी—5% और 18%।

  • 12% और 28% स्लैब हटने से कई प्रोडक्ट्स और सेवाओं पर टैक्स घटेगा।
  • छोटे व्यवसायियों और स्टार्टअप्स को राहत मिलेगी।
  • उपभोक्ताओं को कम कीमत पर सामान मिलेगा।
  • टैक्स संरचना सरल होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुपालन आसान होगा।

सरकार के इस फैसले को जनता और व्यापारियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपनी पुरानी चेतावनी और सुझावों की जीत बताया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या यह बदलाव सचमुच आर्थिक गतिविधियों को गति देगा या फिर इसे भी महज राजनीतिक एजेंडा मानकर भुला दिया जाएगा।

 

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