समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी असम 5 मई : असम और पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत ने विपक्षी खेमे, विशेषकर कांग्रेस में उथल-पुथल मचा दी है। असम में भाजपा और उसके सहयोगियों की प्रचंड सफलता के बाद कांग्रेस के भीतर इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। सबसे बड़ा झटका पार्टी को तब लगा जब असम कांग्रेस के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। जितेंद्र सिंह का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि चुनावी हार के बाद कांग्रेस में गंभीर असंतोष और आत्मविश्लेषण का दौर चल रहा है।
असम विधानसभा की कुल 126 सीटों में से भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को 102 सीटों पर जीत मिली है। अकेले भाजपा ने 82 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि उसके सहयोगी बोडो पीपुल्स फ्रंट (BPF) और असम गण परिषद (AGP) को 10-10 सीटें मिली हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा और वे मुख्य विपक्ष की भूमिका में भी कमजोर नजर आए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, भाजपा की यह जीत उसकी संगठनात्मक मजबूती, जमीनी कार्य, और साफ-सुथरे नेतृत्व का परिणाम है। इसके विपरीत, कांग्रेस में चुनावी रणनीति की कमी और आंतरिक कलह के कारण पार्टी को भारी नुकसान हुआ। जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं में जहां उत्साह है, वहीं कांग्रेस में इस्तीफों का दौर चिंता का विषय बन गया है।
जितेंद्र सिंह के इस्तीफे के बाद कांग्रेस हाईकमान पर दबाव है कि वह संगठन में व्यापक बदलाव करें और जमीनी स्तर पर पार्टी को पुनर्जीवित करें। जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस हार से सबक नहीं लेती तो भविष्य में पार्टी के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
असम के चुनाव परिणामों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा का जनाधार लगातार मजबूत हो रहा है और विपक्ष को अपनी रणनीति और संगठन पर फिर से विचार करना होगा। वहीं, इस्तीफों का यह सिलसिला कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय है।
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