भारत में रहते हो तो नागरिकता क्यों नहीं लेते: HC

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान को लगाई कड़ी फटकार, OCI कार्डधारकों को देश में प्रदर्शन करने का कोई अधिकार नहीं होने की बात दोहराई।

  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेता इमरान खान के खिलाफ सख्त टिप्पणियां कीं।
  • अदालत ने पूछा- भारत में जन्म और कमाई के बाद भी नागरिकता क्यों नहीं?
  • OCI कार्डधारकों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का अधिकार नहीं है।

समग्र समाचार सेवा
मुंबई, 03 नवंबर: बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के ‘लीव इंडिया नोटिस’ (Leave India Notice) को चुनौती देने वाली अभिनेता इमरान खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए बेहद कड़े रुख का परिचय दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ओवरसीज नागरिकता (OCI) कार्डधारकों को भारत में किसी भी प्रकार के राजनीतिक या सामाजिक विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत एम. सेठना की खंडपीठ ने अभिनेता से सीधा सवाल किया कि जब वह भारत में ही पले-बढ़े हैं, यहीं काम करते हैं और अपनी आजीविका कमाते हैं, तो उन्होंने अब तक भारतीय नागरिकता क्यों नहीं अपनाई?

अदालत ने सख्त लहजे में यह भी कहा कि विदेशी नागरिकों को देश के कानूनों और OCI नियमों का पूरी तरह सम्मान करना चाहिए तथा वे भारतीय नागरिकों के समकक्ष खड़े होकर किसी भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा नहीं ले सकते।

कथित विरोध प्रदर्शन और FRRO नोटिस का पूरा मामला

यह पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब अभिनेता इमरान खान कथित तौर पर मुंबई में एक विरोध प्रदर्शन (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर) में शामिल हुए थे। इस घटना के बाद FRRO ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस जारी कर दिया था। इस नोटिस के खिलाफ अभिनेता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष (ASG) ने दलील दी कि एक विदेशी नागरिक और OCI कार्डधारक होने के नाते इमरान खान देश की आंतरिक राजनीतिक गतिविधियों या विरोध प्रदर्शनों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो सकते। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट और गतिविधियों ने कथित तौर पर इस मामले में स्थिति को और गंभीर बनाया है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियां किसी अन्य देश में की जातीं, तो विदेशी नागरिक के खिलाफ बहुत कड़ी और त्वरित कार्रवाई की जाती।

बिना शर्त माफी और अदालत का रुख

अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद अभिनेता के वकीलों ने पक्ष रखते हुए कहा कि वह मामले में बिना शर्त माफी (Unconditional Apology) मांगने और भविष्य में इस तरह की किसी भी गतिविधि में शामिल न होने का लिखित हलफनामा (Undertaking) देने को तैयार हैं। अदालत ने नरमी बरतते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर तक तय की है और तब तक FRRO नोटिस पर अपनी पिछली अंतरिम राहत को बरकरार रखा है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि OCI कार्डधारकों को देश के नियमों की सीमाएं कभी नहीं भूलनी चाहिए।

निष्कर्ष

बॉम्बे हाईकोर्ट का यह कड़ा फैसला उन सभी विदेशी नागरिकों और OCI कार्डधारकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो भारत में रहते हुए यहां की आंतरिक राजनीतिक या विरोध गतिविधियों में संलिप्त होते हैं। अदालत की यह टिप्पणी न केवल कानूनी अनुशासन को रेखांकित करती है, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और नियमों के पालन की अनिवार्यता को भी मजबूती देती है।

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