नव वर्ष से पहले ब्रिक के नए सचिवालय का उद्घाटन, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति: डॉ. जितेंद्र सिंह

जैव-विनिर्माण में भारत वैश्विक स्तर पर 12वें स्थान पर, बायोई3 नीति के तहत ब्रिक बनेगा जैव-विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़

  • नई दिल्ली में ब्रिक सचिवालय का उद्घाटन, 14 स्वायत्त संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय का लक्ष्य
  • बायोई3 नीति के तहत बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में ब्रिक की अहम भूमिका
  • भारत को 2047 तक वैश्विक जैव-प्रौद्योगिकी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम
  • स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और उद्योग के साथ साझा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की योजना

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 30  दिसंबर: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नव वर्ष से पूर्व जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं नवाचार परिषद (ब्रिक) के नए सचिवालय परिसर का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे भारत की भावी जैव-अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

नई दिल्ली के एनएसआईसी बिजनेस पार्क की चौथी मंजिल पर स्थित यह सचिवालय ब्रिक के 14 स्वायत्त संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा। यह व्यवस्था संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखते हुए जैव प्रौद्योगिकी विभाग, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के साथ सहयोग को बढ़ावा देगी।

उद्घाटन के बाद आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-विनिर्माण के क्षेत्र में भारत वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 12वें स्थान पर है और ब्रिक इस स्थिति को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि बायोई3 नीति के अंतर्गत ब्रिक भारत के जैव-विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की मेरुदंड के रूप में उभर रहा है।

इस अवसर पर जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव एवं ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले ने ब्रिक की अब तक की उपलब्धियों और चल रही परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बायोई3 नीति के तहत बायोई3 पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां ब्रिक संस्थान, स्टार्ट-अप्स, एमएसएमई और बड़े उद्योग एक ही परिसर में अनुसंधान से लेकर व्यावसायीकरण तक की पूरी श्रृंखला को साकार करेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक के संस्थान विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जैव-विज्ञान और जैव-विनिर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय विकास को नई दिशा देंगे। उन्होंने समग्र-सरकारी और समग्र-सामाजिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि संरचनात्मक बाधाओं को दूर कर भारत को जैव-प्रौद्योगिकी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

गोलमेज सम्मेलन के दौरान मंत्री ने विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों के अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि बीते एक दशक में सरकार ने अनावश्यक नियमों को हटाकर शासन को सरल और प्रभावी बनाया है। साथ ही, बीआईआरएसी के सहयोग से नवाचार, संसाधनों के बेहतर उपयोग और मानव संसाधन विकास को नई गति मिली है।

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