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बेंगलुरु में सोने के दाम में गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड 111710 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुँचा, चांदी भी सस्ती
Global Governance News September 17, 2025

बेंगलुरु में सोने के दाम में गिरावट, 24 कैरेट गोल्ड 111710 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुँचा, चांदी भी सस्ती

समग्र समाचार सेवा बेंगलुरु, 17 सितंबर: बेंगलुरु में आज सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। बीते दिन जहां सोने ने ऊँचा भाव छुआ था, वहीं बुधवार को...

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सजग नागरिक और नीडोनॉमिक्स : विकसित भारत की ओर हरित मार्ग
Global Governance News September 17, 2025

सजग नागरिक और नीडोनॉमिक्स : विकसित भारत की ओर हरित मार्ग

प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक एवं पूर्व कुलपति आर्थिक प्रगति और भौतिक विकास की दौड़ में हम एक महत्वपूर्ण सत्य को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं—विकास केवल यह नहीं है कि हम क्या बनाते हैं, बल्कि यह भी है कि हम कैसे जीते हैं और क्या संजोते हैं। “हरित कल के लिए सजग नागरिक” कोई कल्पना नहीं, बल्कि आवश्यकता है, और नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी) इस दिशा में स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है। नीडो-उपभोग (माइंडफुल कंजम्पशन) की वकालत करते हुए, नीडोनॉमिक्स विकास की उस परिभाषा को प्रस्तुत करता है जो आवश्यकता, संतुलन और पर्यावरणीय चेतना पर आधारित है, न कि अनियंत्रित उपभोग और लालच पर। जैसे-जैसे भारत 2047 तक विक्सित भारत बनने की दिशा में अग्रसर है—जो स्वतंत्रता के 100 वर्षों का प्रतीक होगा—वैसे-वैसे पर्यावरण के प्रति सजग और सामाजिक रूप से उत्तरदायी नागरिकों की भूमिका विशेष रूप से युवाओं में, अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि एनएसटी का जोर सजग व्यवहार, नैतिक निर्णयों और सतत जीवनशैली पर क्यों और कैसे टिकाऊ विकास के सभी पहलुओं—पर्यावरणीय स्थिरता, सामाजिक समानता और जलवायु कार्रवाई—के लिए आवश्यक है। नीडोनॉमिक्स की दृष्टि से सतत विकास को समझना सतत विकास कोई एकतरफा लक्ष्य नहीं है। यह आर्थिक वृद्धि, सामाजिक न्याय और पर्यावरणीय संरक्षण तीनों पर समान रूप से निर्भर करता है। भले ही संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों  जैसे वैश्विक एजेंडे एक रूपरेखा प्रदान करते हैं, लेकिन इन लक्ष्यों की प्राप्ति का दारोमदार जमीनी स्तर पर व्यक्ति और समुदाय के आचरण पर है। एनएसटी एक अद्वितीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है—यह “कम में अधिक” की भावना को बढ़ावा देता है और सिखाता है कि संतोष बहुतायत में नहीं, बल्कि जागरूक आवश्यकता में निहित है।  एनएसटी का मानना है कि असली विकास अनंत इच्छाओं को पूरा करने में नहीं, बल्कि आवश्यक जरूरतों को संतुलित ढंग से पूर्ण करने में है—इस तरह कि आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताएं भी सुरक्षित रहें। इस दिशा में एनएसटी, पर्यावरणीय चेतना को एक अनिवार्यता के रूप में देखता है और इसे शिक्षा, शासन, जीवनशैली और सामाजिक व्यवहार में एकीकृत करने का आग्रह करता है। इसमें शामिल हैं: कचरे को कम करना, ऊर्जा और जल संरक्षण को बढ़ावा देना, हरित व्यवहार को अपनाना, और भावनात्मक, नैतिक व पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता को विकसित करना। करके सीखना: व्यवहारिक पर्यावरण शिक्षा की भूमिका पर्यावरण मूल्यों को विद्यार्थियों में स्थापित करने का सर्वोत्तम तरीका अनुभवात्मक शिक्षा है।  एनएसटी का मानना है कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की सतत गतिविधियों में संलग्न करें: पेड़ लगाना और सब्जियाँ उगाना, ताकि पारिस्थितिकीय परस्परता को समझा जा सके। कचरा पृथक्करण, ताकि दैनिक उपभोग में अनुशासन उत्पन्न हो। पानी और बिजली की बचत, जो नीडो-उपभोग के व्यापक सिद्धांत का हिस्सा है। इन गतिविधियों को अतिरिक्त पाठ्यक्रम या प्रतीकात्मक कार्य न मानकर जिम्मेदार नागरिकता का आवश्यक हिस्सा माना जाना चाहिए। जब छात्र यह देखते हैं कि उनके छोटे-छोटे कार्यों का पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, तो वे चयन और परिणाम के बीच संबंध को समझने लगते हैं। एनएसटी का मानना है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं—विशेषकर जब उन्हें शिक्षा संस्थानों में व्यवस्थित रूप से अपनाया जाए। सजग उपभोग और उत्तरदायी आदतें ही अब राष्ट्र निर्माण का नया पाठ्यक्रम बननी चाहिए। सरकारी समर्थन और सामुदायिक सहभागिता भारत सरकार ने पर्यावरण चेतना को बढ़ावा देने के लिए अनेक सराहनीय पहल की हैं। नेशनल ग्रीन कोर  जैसी योजनाएं—जिसमें आज भारत के 1.5 लाख से अधिक स्कूल जुड़े हुए हैं—छात्रों में पर्यावरणीय नेतृत्व विकसित करने का मंच प्रदान करती हैं। ये प्रयास पूर्णतः  एनएसटी की नागरिक-केंद्रित विकास दृष्टि के अनुरूप हैं। लेकिन केवल सरकारी योजनाओं से बात नहीं बनेगी।  एनएसटी सभी हितधारकों—शिक्षकों, अभिभावकों, सामुदायिक नेताओं, गैर सरकारी संगठनों, नीति-निर्माताओं और मीडिया—से आह्वान करता है कि वे इस हरित आंदोलन में सहभागी बनें। पर्यावरणीय चेतना को केवल एक अभियान न समझें, बल्कि इसे जीवनभर की प्रतिबद्धता बनाएं। जन जागरूकता अभियानों में शामिल होनी चाहिए ऐसी बातें: सिंगल यूज़ प्लास्टिक से इनकार और कपड़े या जूट के थैले का प्रयोग। पानी की बचत, जैसे लीक को ठीक करना और सीमित उपयोग। सार्वजनिक परिवहन का उपयोग और कार्बन फुटप्रिंट कम करना। अनावश्यक लाइट्स और उपकरण बंद करना। इन सभी कार्यों को नीडो-धर्म का अंग मानना चाहिए—एक ऐसा नैतिक दायित्व जो पर्यावरणीय स्थिरता, राष्ट्रीय निष्ठा और व्यक्तिगत अनुशासन को साथ लेकर चलता है। उदाहरण प्रस्तुत करें: जो कहें, उसे करके दिखाएं एनएसटी का संदेश है—“जो कहें, वो करके दिखाएं”। केवल भाषणों से चेतना उत्पन्न नहीं होती; इसके लिए संस्थागत आचरण भी बदलना होगा। स्कूलों और कॉलेजों को हरित परिसर के रूप में ढालना चाहिए: सौर ऊर्जा पैनल लगाना। वर्षा जल संचयन प्रणाली अपनाना। कागजरहित संवाद को प्रोत्साहित करना। साइकिल व इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना।...

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सोने-चांदी की चमक बढ़ी: दुबई और भारतीय बाजार में भाव ने पकड़ी रफ्तार
Global Governance News September 16, 2025

सोने-चांदी की चमक बढ़ी: दुबई और भारतीय बाजार में भाव ने पकड़ी रफ्तार

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 16 सितंबर: दुबई के सुक बाजार से लेकर भारत के सराफा बाजार तक सोने और चांदी के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। सोमवार को...

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नमो@75: नीडोनॉमिक्स परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत के लिए  जीवन-मुक्ति नेतृत्व
Global Governance News September 16, 2025

नमो@75: नीडोनॉमिक्स परिप्रेक्ष्य में विकसित भारत के लिए जीवन-मुक्ति नेतृत्व

प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक एवं पूर्व कुलपति 17 सितम्बर 2025 को भारत अपने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का 75वां जन्मदिवस मना रहा है—जिन्हें स्नेहपूर्वक "नमो" कहा जाता है। यह अवसर केवल एक नेता के जीवन का व्यक्तिगत उत्सव नहीं है, बल्कि भारत की सामूहिक यात्रा का भी प्रतीकात्मक क्षण है, जो हमें विकसित भारत 2047 की दिशा में अग्रसर करता है। नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी ) प्रधानमंत्री को श्रद्धा सहित शुभकामनाएँ अर्पित करता है और उन्हें एक जीवन-मुक्ति व्यक्तित्व के रूप में वर्णित करता है—जो संन्यास से नहीं बल्कि समाज-सेवा में किए गए पुण्य कर्मों से मुक्ति प्राप्त करता है। अनु-गीता में जीवन-मुक्ति का दर्शन धर्मसम्मत कर्म, निःस्वार्थ सेवा और लोभ-प्रेरित प्रवृत्तियों से विरक्ति पर आधारित है। प्रधानमंत्री मोदी का जीवन इन आदर्शों का मूर्त उदाहरण है। उन्होंने राजनीति को कभी सत्ता का साधन नहीं माना, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का उपकरण बनाया। इस दृष्टि से नमो गीता की उस शिक्षा को मूर्त रूप देते हैं कि सच्ची स्वतंत्रता निःस्वार्थ कर्तव्य-पालन में निहित है। गीता-प्रेरित नीडोनॉमिक्स (आवश्यकताओं की अर्थशास्त्र) आर्थिक शासन के लिए एक ताज़ा किंतु शाश्वत दृष्टिकोण प्रदान करता है। इसे "पुराना अमृत नई शब्दावली में" कहा जा सकता है। नीडोनॉमिक्स हमें याद दिलाता है कि स्थायी प्रगति असीम उपभोक्तावाद या अंधाधुंध संपत्ति संचय (ग्रीडोनॉमिक्स) में नहीं, बल्कि संयम, संतुलन और आवश्यकताओं की प्राथमिकता में निहित है। विकसित भारत 2047 की प्राप्ति के लिए नीडोनॉमिक्स का अनुप्रयोग अनिवार्य है। यह नीडो-उपभोग (सजग उपभोग), नीडो-उत्पादन (जनकल्याण, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक उत्पादन) और नीडो-शासन (समावेशी विकास, स्थिरता एवं नैतिक उत्तरदायित्व पर आधारित शासन) पर बल देता है। नीडोनॉमिक्स के अनुरूप आर्थिक नीतियाँ बनाकर भारत ऐसा मार्ग चुन सकता है जिसमें भौतिक प्रगति और नैतिक दायित्व का संतुलन हो। नमो के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एनएसटी सभी हितधारकों—नागरिकों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों और प्रशासकों—से  स्मार्ट (सिंपल, मॉरल, एक्शन-ओरिएंटेड, रिस्पॉन्सिव और ट्रांसपेरेंट) – सादगीपूर्ण जीवन,  नैतिक आचरण, कर्मप्रधान दृष्टिकोण,  तर्कसंगत निर्णय, सत्यनिष्ठ संबंध बनने का आह्वान करता है। एनएसटी को स्व. प्रो. प्रेम चंद जैन (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष) के वे शब्द स्मरण होते हैं, जिन्होंने नमो को "असीम संभावनाओं वाली अद्वितीय आत्मा" बताया था—जो साधारण सीमाओं से परे जाकर सामूहिक रूपांतरण की प्रेरणा देते हैं। एनएसटी  मानता है कि नमो ऐसे नेता हैं जो गीता की आध्यात्मिक बुद्धि को आधुनिक शासन की व्यवहारिक दृष्टि से जोड़ते हैं। नमो का विकसित भारत का सपना केवल भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं है; उसमें विकास समग्र, समावेशी और सतत है। यह दृष्टि नीडोनॉमिक्स से गहराई से जुड़ी है, जो मानता है कि वास्तविक समृद्धि अधिक पाने में नहीं, बल्कि यह जानने में है कि कब "और अधिक" की आवश्यकता नहीं है। जब प्रधानमंत्री मोदी 75 वर्ष के हो रहे हैं, तब नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करता है—यह केवल जन्मदिवस की बधाई नहीं, बल्कि भारत के लिए एक प्रतीकात्मक आह्वान है। नमो@75 हमें यह याद दिलाता है कि मूल्यों पर आधारित नेतृत्व भारत को स्वतंत्रता की शताब्दी (2047) तक ज्ञान, शक्ति और करुणा के साथ मार्गदर्शन कर सकता है। नमो@75 को नमन—जीवन-मुक्ति मार्ग है नीडोनॉमिक्स।

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जीएसटी हुआ सरल, दो स्लैब से घटेगी टैक्स की मार
Global Governance News September 14, 2025

जीएसटी हुआ सरल, दो स्लैब से घटेगी टैक्स की मार

केंद्र सरकार ने जीएसटी को 5% और 18% के दो मुख्य स्लैब में सरल किया है। इस कदम से आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स का बोझ कम होगा, जिससे आम नागरिकों...

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प्रो. एम.एम. गोयल ने यूजीसी-एमएमटीटीसी जीजीवी बिलासपुर में सतत व्यवसायिक प्रथाओं के लिए नीडोनॉमिक्स को मार्गदर्शक बताया
Global Governance News September 12, 2025

प्रो. एम.एम. गोयल ने यूजीसी-एमएमटीटीसी जीजीवी बिलासपुर में सतत व्यवसायिक प्रथाओं के लिए नीडोनॉमिक्स को मार्गदर्शक बताया

समग्र समाचार सेवा बिलासपुर (छत्तीसगढ़), 12 सितंबर: नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रणेता, तीन बार कुलपति रह चुके एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुरुक्षेत्र) में अर्थशास्त्र के सुपरएन्नुएटेड प्रोफेसर प्रो. मदन मोहन गोयल ने “सतत व्यवसायिक प्रथाओं के लिए नीडोनॉमिक्स की प्रासंगिकता” विषय पर एक ऑनलाइन व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान “सतत व्यवसायिक प्रथाएं और परिपत्र अर्थव्यवस्था” विषयक पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के अंतर्गत यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी), गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (केंद्रीय विश्वविद्यालय), बिलासपुर द्वारा आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. आलोक कुमार सिंह कुशवाहा, निदेशक, एमएमटीटीसी ने की। पाठ्यक्रम संयोजक प्रो. भुवना वेंकटरमन ने स्वागत भाषण दिया और प्रो. गोयल के शैक्षणिक योगदान एवं उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उनका परिचय प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में प्रो. गोयल ने कहा कि नीडोनॉमिक्स और परिपत्र अर्थव्यवस्था का समावेश दक्षता, संतुलन और कल्याण का एक समग्र ढांचा तैयार करता है, जो लालच पर आवश्यकता को प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण, तकनीकी व्यवधान और उपभोक्तावाद की चुनौतियों के बीच पारंपरिक आर्थिक मॉडल केवल लाभ अधिकतम करने पर केंद्रित रहते हैं और समाज, पर्यावरण एवं मानवीय मूल्यों पर दीर्घकालिक प्रभावों की उपेक्षा करते हैं। “नीडोनॉमिक्स एक दूरदर्शी और व्यावहारिक ढांचा प्रदान करता है, जो व्यवसायों को अपनी नीतियों में नैतिकता, पर्यावरण और समानता को शामिल करने की क्षमता देता है,” उन्होंने कहा। प्रो. गोयल ने यह भी कहा कि “सच्ची प्रगति असीमित संचय में नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण उपभोग, जिम्मेदार उत्पादन और उद्देश्यपूर्ण लाभ में निहित है।” उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन, असमानता और संसाधनों की कमी से जूझती दुनिया में नीडोनॉमिक्स केवल एक नैतिक दिशा-सूचक ही नहीं बल्कि एक आर्थिक मार्गदर्शक भी है। अपने वक्तव्य का समापन करते हुए प्रो. गोयल ने कहा कि जो व्यवसाय नीडोनॉमिक्स को अपनाएंगे, वे न केवल बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में टिकेंगे बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और लचीलापन की विरासत भी छोड़ेंगे।  

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भारत-अमेरिका संबंधों पर शशि थरूर का बयान: पीएम मोदी की प्रतिक्रिया स्वागत योग्य, पर सुधार जरूरी
Global Governance News September 8, 2025

भारत-अमेरिका संबंधों पर शशि थरूर का बयान: पीएम मोदी की प्रतिक्रिया स्वागत योग्य, पर सुधार जरूरी

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 8 सितंबर: भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप...

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श्राद्ध पक्ष 2025: सोने और चांदी के दामों में आई गिरावट, जानें आज 8 सितंबर का भाव
Global Governance News September 8, 2025

श्राद्ध पक्ष 2025: सोने और चांदी के दामों में आई गिरावट, जानें आज 8 सितंबर का भाव

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 8 सितंबर: श्राद्ध पक्ष 2025 शुरू हो चुका है और इसे देखते हुए गोल्ड मार्केट में आज सोमवार को गिरावट देखी गई। पहले रविवार की...

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त्योहारी सीजन 2025: शहरी क्षेत्रों में खर्च में 18% बढ़ोतरी, भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्टर डोज
Global Governance News September 8, 2025

त्योहारी सीजन 2025: शहरी क्षेत्रों में खर्च में 18% बढ़ोतरी, भारतीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्टर डोज

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 8 सितंबर: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए त्योहारी मौसम 2025 बड़ी उम्मीद लेकर आया है। सितंबर से नवंबर के बीच शहरी क्षेत्रों के लोग लगभग...

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जीएसटी सुधार से जीडीपी में मिलेगी नई रफ्तार, महंगाई घटने की उम्मीद
Global Governance News September 5, 2025

जीएसटी सुधार से जीडीपी में मिलेगी नई रफ्तार, महंगाई घटने की उम्मीद

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 5 सितंबर: सरकार द्वारा नए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों की घोषणा के एक दिन बाद, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इन...

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