Browsing Category
व्यक्तित्व
प्रेरक कहानी: भगवान की कृपा को समझिए
एक व्यक्ति काफी दिनों से चिंतित चल रहा था जिसके कारण वह काफी तथा तनाव में रहने लगा था। वह इस बात से परेशान था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है, किसी ना किसी रिश्तेदार का उसके यहाँ आना जाना…
रिश्तों की स्टेपनी
कल ही मुझे पता चला कि मेरी एक परिचित, जो दिल्ली में अकेली रहती हैं, उनकी तबियत ख़राब है। मैं उनसे मिलने उनके घर गया। वो कमरे में अकेली बिस्तर पर पड़ी थीं।
तीन पुतले
महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामंत्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे।
कहानी बड़ी सुहानी
यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है कि जैसा भाव हमारे मन मेे होता है वैसा ही भाव सामने वाले के मन में आता है। इस सबंध में एक ऐतिहासिक घटना सुनी जाती है जो इस प्रकार है-
प्रसन्नता का गुब्बारा
एक समय एक आश्रम में एक गुरू के सैकड़ों शिष्य एकत्रित हुए। वे वहाँ अपने गुरू की एक झलक पाने, उनके ज्ञानपूर्ण वचन को सुनने और ध्यान आदि सीखने के लिए एकत्रित हुए थे।
सामवेद परिचय
सामवेद भारत के प्राचीनतम ग्रंथ वेदों में से एक है, गीत-संगीत प्रधान है। प्राचीन आर्यों द्वारा साम-गान किया जाता था। साम‘ शब्द का अर्थ है ‘गान‘। सामवेद में संकलित मंत्रों को देवताओं की स्तुति के समय गाया जाता था। इन ऋचाओं का गान सोमयज्ञ के…
जीवन संघर्ष: आइए बाज की इस कहानी से सीखें जीवन की कठीन परिक्षा कैसे करे पास
बाज पक्षी जिसे हम ईगल या शाहीन भी कहते है। जिस उम्र में बाकी परिंदों के बच्चे चिचियाना सीखते है उस उम्र में एक मादा बाज अपने चूजे को पंजे में दबोच कर सबसे ऊंचा उड़ जाती है।
मृत्यु का भय
मृत्यु का भय....
किसी नगर में एक आदमी रहता था। उसने परदेश के साथ व्यापार किया। मेहनत फली, कमाई हुई और उसकी गिनती सेठों में होने लगी। महल जैसी हवेली बन गई। वैभव और बड़े परिवार के बीच उसकी जवानी बड़े आनंद से बीतने लगी।
एक दिन उसका एक…
मिर्च-मसाला- बिहार में हवाई अड्डों की राजनीति
सियासत को तो यूं भी पंख फैला कर उड़ने की आदत होती है, ऐसे में जब बात हवाई अड्डों की हो तो सियासतदां भी आसमां से चुगली करने लग जाते हैं।
छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक पर देश मे सालभर होंगे आयोजन
जय शिवा सरदार की-जय राणा प्रताप की...!! इस जयघोष के बगेर भगवा वाहिनी का दिन मुकम्मल नही होता हैं। शाखाओं पर ये जयघोष स्वयंसेवक में राष्ट्र निष्ठा-धर्म निष्ठा का प्राण फूंकता हैं।