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व्यक्तित्व
‘स्टील का डब्बा’
चिलचिलाती ज्येष्ठ की दुपहरी हो या सावन की घनघोर बारिश हो सरला अपने बेटे आलेख की स्कूल बस के इन्तजार में समय से पहले बस स्टॉप पे आकर खड़ी हो जाती थी.पल्लु से पसीना पोछती या फिर बारिश की बूंदे हटाते हुए वो बार बार सड़क में दूर तक निगाह दौड़ाती.
8 दिसम्बर/जन्म-दिवस”- मानवतावादी कवि बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी
कवि बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ का जन्म8 दिसम्बर, 1897 को ग्राम म्याना (शाजापुर, म.प्र.) में एक धर्मप्रेमी परिवार में हुआ था। इनके जन्म के समय उनके पिता प्रसिद्ध तीर्थस्थल नाथद्वारा में रह रहे थे। शाजापुर से मिडिल और उज्जैन से हाईस्कूल की परीक्षा…
भारत की पहचान किनसे है?
ऐसा कौन सा व्यक्तित्व है, जो भारत की पहचान को परिभाषित कर सकता है?— वह, जिसने इस देश की मूल बहुलतावादी संस्कृति को ध्वस्त किया हो या फिर वे, जिन्होंने उसकी रक्षा में अपने प्राण आहुत कर दिए। यह चर्चा 'पूर्वोत्तर के शिवाजी' नाम से प्रसिद्ध,…
राजा दशरथ के मुकुट का एक अनोखा राज!!!!!!
अयोध्या के राजा दशरथ एक बार भ्रमण करते हुए वन की ओर निकले वहां उनका समाना बाली से हो गया. राजा दशरथ की किसी बात से नाराज हो बाली ने उन्हें युद्ध के लिए चुनोती दी. राजा दशरथ की तीनो रानियों में से कैकयी अश्त्र शस्त्र एवं रथ चालन में पारंगत…
हम कब अपने नायकों को पहचानेंगे?
-बलबीर पुंज।
जो राष्ट्र अपने नायकों को नहीं पहचानता, उनका सम्मान नहीं करता— वह जीवित रहने का अधिकार खो देता है। पहले भारत का तीन हिस्सों (खंडित भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश) में विभाजित होना, फिर कश्मीर के एक तिहाई पर कब्जा हो जाना और…
“लचित बोरफुकन का जीवन हमें ‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र के साथ जीने के लिए प्रेरित…
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में लचित बोरफुकन की 400वीं जयंती के साल भर चलने वाले समारोह के समापन समारोह में संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर 'लचित बोरफुकन – असम्स हीरो हू हाल्टेड द मुगल्स' नामक पुस्तक का विमोचन…
लचित बोरफुकन और उनके सैनिकों के अन्दर राष्ट्रभक्ति की जो प्रखर भावना थी उसका एक कतरा मात्र भी मुगलों…
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरूवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में श्री लचित बोरफुकन की 400वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा और केन्द्रीय मंत्री…
लाचित बरफूकन: एक अपराजित महान योद्धा
औरंगजेब जब दिल्ली का बादशाह बना तो उसने पश्चिम असम पर आक्रमण कर उसे अपने कब्जे में कर लिया, और रसीद खां को वहां के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया। लेकिन अहोम के राजा चक्रध्वज सिंह (1663-1669) को मुगलों के अधीन रहना स्वीकार नहीं था।
चौधरी छोटू राम एवं शुद्धिआन्दोलन
दीनबंधु चौधरी छोटूराम जैसा किसान हितैषी आज तक नहीं हुआ। चौधरी साहब ने अपना जीवन किसानों के हित के लिए जिया। किसान चाहे किसी भी मजहब या जाति का रहा हो, उनके लिए वह अपना था। उन्होंने अपने प्रेरणास्रोत ऋषि दयानंद के वाक्य ‘किसान राजाओं का राजा…
24 नवम्बर 1918 जन्म-दिवस- सरसंघचालकों की छाया डा. आबाजी थत्ते
सरसंघचालक श्री गुरुजी और फिर बालासाहब देवरस के प्रवास में उनकी छाया की तरह साथ रहने वाले डा. वासुदेव केशव (आबाजी) थत्ते का जन्म 24 नवम्बर, 1918 को हुआ था। उनका पालन स्टेट बैंक में कार्यरत उनके बड़े भाई अप्पा जी और भाभी वाहिनी थत्ते ने अपने…