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जीजीएन विशेष
मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (1)
पार्थसारथि थपलियाल
भारतीय संवाद परंपरा में मन में उपजे भावों का विचारों में बदलने के बाद दो स्वरूपों में से एक पक्ष को आधार बनाना है। ये दो पक्ष हैं- परामर्श और विमर्श। परामर्श में सलाह, राय, मत, अभिमत आदि शामिल होते हैं जबकि विमर्श…
राष्ट्रप्रथम- बछिया का खूंटा, जिस पर कूदे बछिया
पार्थसारथि थपलियाल
कल 10 जून शुक्रवार देश के अनेक भागों में दोपहर की नमाज के बाद नमाजी सड़कों पर उतर आए और प्रदर्शन करने लगे। इन प्रदर्शनों का कोई घोषित नेता नही था। यह विचारणीय है कि जिस प्रदर्शन का कोई नेता न हो तो वह अचानक कैसे…
राष्ट्रप्रथम- चोर नही चोर की माँ को पकड़ें
पार्थसारथि थपलियाल
भारत मे अधिकतर लोगों को यह ज्ञान नही कि बताने, बोलने, कहने, चिल्लाने और भौंकने में शब्दों का ही अंतर नही बल्कि क्रिया का भी अंतर है, भावना और संस्कृति का भी अंतर है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में वर्णित…
राष्ट्रप्रथम- पंजाब के आब को दूषित करते कड़वे बोल
पार्थसारथि थपलियाल
भारत के सच्चे राष्ट्रीय नेता की पार्टी जबसे पंजाब में सरकार बनाई है, तब से ऐसे ऐसे गुल खिला रही है जिसकी कभी उम्मीद भी नही की गई होगी। इस देश मे कई लोगों ने फोर्ड फाउंडेशन की आर्थिक मदद से कई तरह के फ़्रॉड किये,…
यादों के झरोखे से- ख्वाबों और खयालों से बनी तेरी तस्वीर
पार्थसारथि थपलियाल
मेरे एक मित्र ने आज कल व्हाट्सएप पर लिखा- तस्वीर। मुझे नही मालूम कि वे मुझे क्या याद दिलाना चाहते थे, इतना मुझे याद था कि वे मेरे शब्द संदर्भ कॉलम के नियमित पाठक थे। तस्वीर शब्द पढ़ते ही मैं अचानक वर्ष 1992-93 की…
मिर्च-मसाला- रामपुर के आजम की निष्ठाएं किधर हैं?
त्रिदीब रमण
’जब से पागल हवाओं ने हर छोटे-बड़े दीयों का काम तमाम किया है
इस आदम के जंगल ने अपना कल इन जुगनुओं के नाम किया है’
सियासत की सीरत ही कुछ ऐसी है कि यहां असल वफादारी भी नैतिक दीवालियापन के अंतःपुर में बेशर्मी से पसरी…
संस्कृति- तार तार होती संबंधों की मर्यादाओं की रिलेशनशिप
पार्थसारथि थपलियाल
विभिन्न आकाशवाणी केंद्रों पर रेडियो ब्रॉडकास्टर के रूप में काम करते हुए अपनी सेवा के संध्या काल मे मेरा तबादला नागौर से दिल्ली हुआ। मैंने अपना कार्यभार प्रसारण भवन दिल्ली में (2011) संभाला। . लिव इन रिलेशन की सबसे…
चिंतन- संस्कृति का विकृत रूप
पार्थसारथि थपलियाल
भारतीय चिंतन परंपरा में ईश्वर की उपस्थिति सर्वत्र मानी गई गई। ईशोपनिषद में कहा गया है कि "ईशावास्यमिदं सर्वं यदकिंचिदजगत्यां जगत" .. संसार की प्रत्येक वस्तु में ईश्वर का वास है। वैदिक संस्कृति में ईश्वर को ब्रह्म…
जन्मदिन विशेष: साधारण युवक से क्रांतिकारी कैसे बने थे राम प्रसाद बिस्मिल, कैसा रहा आज़ादी का सफर
स्निग्धा श्रीवास्तव
11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर शहर के खिरनीबाग मुहल्ले में पं. मुरलीधर की पत्नी मूलमती की कोख से जन्मे राम प्रसाद बिस्मिल अपने माता-पिता की दूसरी सन्तान थे। उनसे पूर्व एक पुत्र पैदा होते ही मर चुका था।…
श्रीगुरु जी और बन्दा बहादुर का मिलन (इतिहास निर्माण करने वाली घटना)
राजिंदर सिंह
गुरु गोविन्द सिंह एक ऐसे सामर्थ्यवान् व्यक्ति की खोज करने लगे जिसको वे भावी नेतृत्व सौंप सकें। अपने दीवानों और सभासदों से विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने नान्देड़ के एक आश्रम में वर्षों से रह रहे वैरागी माधोदास को नेतृत्व…