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विश्लेषण
देश के समक्ष राष्ट्रवाद की आड़ में साम्प्रदायिकता रुपी गंभीर चुनौती…..
शिवानन्द तिवारी।
भारतीय मूल के ऋषि सुनक जिनको अपने हिंदू होने का गर्व है, इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं. इंग्लैंड ईसाइयों का देश है. वहां हिंदुओं की आबादी मात्र 1.5 प्रतिशत है. उस समाज में ऋषि सुनक अपना धार्मिक…
क्या है दिल्ली में भाजपा का ’मास्टर स्ट्रोक’
त्रिदीब रमण।
’बात इतनी सी थी मगर बता नहीं पाए
गैरों के आगे तुझे गले लगा नहीं पाए
शहर में इन दिनों काफिरों की आवाज़ाही है बहुत
क्यों तुम्हें खुदा अपना बना नहीं पाए’
सवाल यह लाख टके का है कि क्या केजरीवाल की दिल्ली उनकी मुट्ठियों से…
अध्यक्ष बनने से क्यों इंकार कर रहे हैं राहुल?
’सिर्फ इसीलिए आंधियों ने हर मुमकिन तुझे डराया होगा
एक दीया रौशन जो तेरी आंखों में उसे नज़र आया होगा’
राहुल गांधी सुप्त प्रायः कांग्रेस में एक नई जान फूंकने की मशक्कत में जुटे हैं, ड्राईंग रूम से निकल कर कांग्रेसी नेतागण सड़क पर…
मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (5)
पार्थसारथि थपलियाल
पंचनद -क्षमता और दुर्बलता पर अध्यक्षीय संवाद
14 जून को पंचनद मंथन शिविर में पंचनद शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर बृजकिशोर कुठियाला चतुर्थ सत्र के प्रस्तोता थे। प्रोफेसर कुठियाला वयोवृद्ध ऊर्जावान-युवा हैं। इस…
मंथन- पंचनद : विमर्श का सांगोपांग मंथन (4)
पार्थसारथि थपलियाल
वैचारिक युद्ध के नए आयाम- मा. जे. नंदकुमार
14 जून को तीसरे सत्र का विषय था वैचारिक युध्द के नए आयाम। विशेषज्ञ वक्ता थे मा. जे.नंदकुमार। जे.नंदकुमार जी मूल रूप से आदि गुरु शंकराचार्य की जन्मभूमि केरल में जाये…
23 जून/जन्म-दिवस: कर्नाटक केसरी : जगन्नाथ राव जोशी
अजेय कुमार
भारतीय जनसंघ के जन्म से लेकर अपनी मृत्यु तक सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अलख देश भर में जगाने वाले, कर्नाटक केसरी के नाम से विख्यात श्री जगन्नाथ राव जोशी का जन्म कर्नाटक के नरगुंड गांव में 23 जून, 1920 को हुआ था। उनके पिताजी पर उस…
मिर्च-मसाला- जो सवाल वरुण ने उठाए, देश से मिला जवाब
त्रिदीब रमण
’यह एक चिराग भी आंधियों के खिलाफ ऐलान हो सकता है
सोई कौमें जाग जाएं तो हर बच्चा हिंदुस्तान हो सकता है’
भाजपा के अपने ही सांसद वरुण गांधी ने जब देश के करोड़ों बेरोजगार युवकों के हक की लड़ाई लड़ने का बीड़ा उठाया तो कम ही…
राष्ट्रप्रथम- आत्मनिर्भर बनते भारत पर वक्र दृष्टि
पार्थसारथि थपलियाल
रामचरितमानस में धनुषयज्ञ प्रकरण में धनुष टूट जाने के बाद परशुराम राजा जनक के दरबार मे पहुंच जाते हैं जहां सीता स्वयंवर आयोजित था। शिवजी के खंडित धनुष देखते ही परशुराम जब क्रोधाग्नि में आ गए। बोले- यह धनुष किसने…
राष्ट्रप्रथम- अस्त्युत्तरस्यां दिशि देवतात्मा
पार्थसारथि थपलियाल
पुराणों में वर्णित केदारखंड (गढ़वाल) और मानसखंड (कुमाऊं) क्षेत्र को समग्र रूप में उत्तराखंड कहा जाता है। 1947 में अंग्रेज़ी शासन से मुक्ति के बाद ब्रिटिश गढ़वाल भारत संघ में मिल गया। 1949 में टिहरी नरेश मानवेन्द्र…
राष्ट्रप्रथम- स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर बढ़ने की आकांक्षा
पार्थसारथि थपलियल
भारत युग युगों से विभिन्न राज्यों सहित एक राष्ट्र रहा है। इस राष्ट्र की एक संस्कृति रही है। एक संस्कृति के कुछ सम्यक जीवन आधार रहे हैं। यह नही कि सब लोग एक तरह का खान पान करते हो या परिधान पहनते हैं। खान पान, रहन…