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व्यक्तित्व
आज का प्रेरक प्रसंग – विश्वास की जीत
एक बार एक गांव में एक सज्जन पुरूष रहते थे, वे बहुत ही दयालू तथा हृदय ग्राही थे, किसी को भी कभी अपशब्द नहीं कहते थे। जो भी उनके घर आता वे अच्छे से उसका आथित्य सत्कार करते। लोग उनसे सलाह मशविरा लेने आया जाया करते थे।
सत्ताधारियों द्वारा अफसरों से वफादारी निभाने की अपेक्षा और दुरुपयोग
कर्नाटक में पिछले दिनों देश के 26 राजनैतिक दलों के नेताओं की बैठक के लिए राज्य की कांग्रेस सरकार ने करीब तीस आई ए एस अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी।
निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा के भी बागी तेवर, सरकार व कांग्रेस में अभी और होगा बिखराव
राजस्थान के सैनिक कल्याण राज्य मंत्री राजेंद्र गुढ़ा को 21 जुलाई की रात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया। गुढा ने दिन में विधानसभा में अपनी ही सरकार पर आरोप लगाया था कि महिलाओं को सुरक्षा देने में गहलोत सरकार विफल…
2023 की नई फ़िल्म -राहुल की दाढ़ी और शोले
जो 1980 के दशक में जो शोले बनी थी , वो काफ़ी लोकप्रिय हुई थी, अब एक नयी फ़िल्म “राहुल की दाढ़ी व शोले”बनी है , उसके डायलॉग सुनिए -आनंद आएगा -खुश रहिए व जगत को भी खुश रहिए -जगत का मतलब जगत प्रकाश नाड्डा नहीं समझ लेना आप -यहाँ जगत का मतलब…
सीमा हैदर के प्यार का पंचनामा, अब पाकिस्तान वापस जाएगी तथाकथित पाकिस्तानी प्रेमिका???
ATS के सवालों में उलझी पुलिस की हर बात का तपाक से जवाब देने वाली सीमा
ईमानदारी के मिसाल -आर्य
यह घटना सन् 1947 में भारत के विभाजन से पूर्व की है। आर्यसमाज के विद्वान एवं शास्त्रार्थ महारथी पं. लोकनाथ तर्कवाचस्पति एक गांव में प्रचारार्थ आये थे। वहां बिजली नहीं थी।
हम सबके रज्जू भैय्या, १४ जुलाई/ पुण्य-तिथि..
प्रो॰ राजेन्द्र सिंह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चौथे सरसंघचालक थे, जिन्हें सर्व साधारण जन से लेकर संघ परिवार तक सभी जगह रज्जू भैय्या के नाम से ही जाना जाता है।
गोमुख के अद्धभुत रहस्य
गोमुख का मार्ग बहुत विकट है। सड़क तो क्या कोई पगडंडी भी नहीं है। ऊबड़ खाबड़ पड़े हुए पत्थरों पर चलना पड़ता है, वैसे अब कुछ दूर तक मार्ग बन गया है।
कलात्मक व्यंग का बेहतरीन उदाहरण है विवादित फिल्म ‘72 हूरें’…पिछले चार साल से डिब्बाबंद थी मूवी
'72 हूरें' टाइटिल ही ऐसा था कि थिएटर वाले रिलीज करने को तैयार नहीं थे, इसलिए ये मूवी पिछले चार साल से डब्बे में बंद पड़ी थी। कहा जाता है कि ओटीटी वाले भी मुस्लिमों की भावनाओं को आहत करने वाले टाइटिल की इस मूवी को रिलीज करने को राजी नहीं थे।
प्रेरक कहानी: भगवान की कृपा को समझिए
एक व्यक्ति काफी दिनों से चिंतित चल रहा था जिसके कारण वह काफी तथा तनाव में रहने लगा था। वह इस बात से परेशान था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है, किसी ना किसी रिश्तेदार का उसके यहाँ आना जाना…