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संस्कृति : लोकमंथन (11)- वंशावली लेखन की भारतीय परंपरा-1

हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गई। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों…

संस्कृति – लोकमंथन (10)- आस्था और विज्ञान : अध्यक्षीय चिंतन

22 सितंबर 2022 को दोपहर के भोजन के बाद का सत्र आस्था और विज्ञान की परंपरा पर ज्ञान का अद्भुत संगम था। प्रोफेसर अभिराज राजेन्द्र मिश्र द्वारा सनातन संस्कृति में आस्था पक्ष की विवेचना और विदुषी डॉ. नीरजा गुप्ता द्वारा आस्था में समाहित विज्ञान…

संस्कृति : लोकमंथन (9)- भारत में आस्था और विज्ञान की लोक परम्पराएं -2

हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गई।

संस्कृति : लोकमंथन (7)

22 सितंबर 2022 को श्रीमंता शंकर देव कलाक्षेत्र के पांडाल में मुख्यवक्ता के रूप में "लोकपरम्परा" पर लोक कला मर्मज्ञ (पद्मश्री) डॉ. कपिल तिवारी के व्याख्यान के सार की दूसरी और समापन कड़ी…

संस्कृति : लोकमंथन (6)

हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गई। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों…

संस्कृति : लोकमंथन (5) मुख्य अतिथि माननीय उपराष्ट्रपति का संबोधन

हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गई।

दीपावली का महत्त्व और उसकी विशेषता

यहाँ षष्ठी-तत्पुरुष समास है, जिसका अर्थ है दीपों का समूह। इस दिन पूरा देश दीपों की जगमगाहट से चमकता रहता है । यह पर्व पाँच दिनों तक मनाया जाता है । जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से शुरु होकर कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक चलता है ।

 प्रशांत किशोर की बिहार जन यात्रा का मक़सद ??

प्रशांत किशोर की पद यात्रा का मक़सद धीरे-धीरे साफ़ होता जा रहा है. बिहार की दोनों ख़ेमों की राजनीति से अलग एक नई राजनीति की शुरुआत के मक़सद से शुरू की गई यह पद यात्रा नीतीश विरोध की राजनीति में बदलती जा रही है.

शब्द बिना जग सूना !

कुमार राकेश कहते है शब्द बिना जग सूना .शब्द ब्रह्म है , शब्द तेज है , शब्द शक्ति है, शब्द भक्ति है ,शब्द मुक्ति है ,शब्द है तो संसार है , नहीं तो सब बेज़ार है .शब्द जान है ,शब्द पूजा है ,शब्द साधना है , शब्द आराधना है, शब्द दुनिया है…