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विचार
IPS संजय सिंह इंसानियत और काबलियत की मिसाल
इंद्र वशिष्ठ
दिल्ली पुलिस में स्पेशल कमिश्नर (लाइसेंसिंग और लीगल डिवीजन) संजय सिंह भारतीय पुलिस सेवा में अपनी 33 वर्ष की शानदार पारी सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद आज सेवानिवृत्त हो गए।
आईपीएस के 1990 बैच के संजय सिंह ने अपनी पुलिस सेवा की…
राष्ट्रप्रथम- ग़लत फहमी के नैरेटिव की पाठशाला
पार्थसारथि थपलियाल
पापी पेट क्या नही करवाता इसका प्रबल उदाहरण है पत्रकारिता। 30-35 साल पहले झूठ का सच गड़ने वाले न समाचार पत्र हुआ करते थे न रेडियो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। आकाशवाणी विवादित विषयों की बजाय सामाजिक उत्थान, विकासात्मक और…
सार्वजनिक जीवन के वैचारिक बौने लोग
पार्थसारथि थपलियाल
भारत में मर्यादाओं की रक्षा समाज स्वयं करता आया है। लोक संस्कार, लोक व्यवहार, लोक अभिव्यक्ति और प्रदर्शन को लोक-मर्यादा और लोक-लाज नियंत्रित करते रहे। मर्यादाविहीन आचरण करने वाले स्वयं ही खलनायक बन जाते हैं।
लोक…
अजय सिंह “राहुल” का टिकट काटने की तैयारी ?
अरुण दीक्षित
क्या कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय सिंह "राहुल" को पार्टी के भीतर हाशिए पर धकेला जा रहा है ?उनके आसपास के लोगों को आगे बढ़ाकर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश कांग्रेस हाई कमान कर रही है?उनका विधानसभा टिकट काटने की…
मीडिया की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
*कुमार राकेश
वर्ष 1999 की बात हैं.देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे.देश के सभी पत्रकार यूनियनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियो का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने प्रधानमंत्री आवास 7,रेसकोर्स मार्ग (अब लोक कल्याण मार्ग) पहुंचा.तमाम वरिष्ठ…
”ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन…”
*डा. प्रकाश हिन्दुस्तानी
जब भी देश-प्रेम की बात होती है तब शहादत या बलिदान की बात पहले होती है, या फिर यह बात होती है कि मेरा देश ही सर्वश्रेष्ठ है। सभी को अपना मुल्क ही सबसे अच्छा लगता है। लेकिन आज मैं जिस गाने की बात…
चैट -जी.पी.टी से क्यों डरे हुए हैं लेखक ??
*संजय स्वतंत्र
इन दिनों चैट जीपीटी की बड़ी चर्चा है। मेरे पास कई युवा पत्रकारों के फोन आते हैं। उनका यही सवाल होता है कि क्या एआइ (कृत्रिम मेधा) और चैट जीपीटी से हमारा भविष्य खतरे में है। मैं उन्हें कहता हूं, शायद, मगर पूरी तरह नहीं। याद…
मिर्च-मसाला- स्वच्छता आंदोलन के सबसे बड़े पुरोधा को गमगीन विदाई!
त्रिदीब रमण
’इतना मलाल तो सूरज को भी हो रहा है तेरे जाने से
तू कब पीछे रहा है बुझे दिलों में चिराग जलाने से’
सुलभ स्वच्छता आंदोलन के पुरोधा पद्म भूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक का यूं अचानक चले जाना, स्तब्ध कर देने वाला है। बिहार के एक छोटे…
वा रे पंकज तिरपाठी भिया,,ग़दर तो आपने मचा दिया !!
*डॉ.प्रकाश हिन्दुस्तानी
सलंग दो फ़िल्में देखीं। दोनों पुरानी फिल्मों की कड़ियाँ थीं। OMG 2 और ग़दर 2 . ग़दर 2001 में आई थी। OMG 2012 में। दोनों फिल्मों का जॉनर अलग है। दोनों को परिवार के साथ देखा जा सकता है। दोनों फिल्मों की अपनी…
“जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकाम”
*डॉ प्रकाश हिन्दुस्तानी
करीब आधी सदी पहले 1974 में फिल्म आई थी -'आपकी कसम'। जिसका यह कालजयी गाना 'जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते हैं जो मकाम' आज भी अपने दार्शनिक बोल, मधुर संगीत और स्वर के लिए याद किया जाता है। जब किशोर…