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विश्लेषण

तेजप्रताप की जगह डिंपल क्यों उतरीं मैदान में?

त्रिदीब रमण। ’घर-घर में आज भी चल रही राम कथा है विभीषण जिंदा है, सीता की वही पुरानी व्यथा है’ यादव परिवार की इस चिंता ने कि ‘घर का भेदी अगर लंका ढाह सकता है’ तो फिर मैनपुरी का उप चुनाव किस खेत की मूली है, इस ख्याल ने अखिलेश को सपा…

अब और नहीं, श्रद्धा……उनका श्राद्ध होगा ……

*कुमार राकेश ———————- ज़रा सोचिए - श्रद्धा कौन थी? क्यों मारी गयी? कौन ज़िम्मेदार ? मेरा मानना है , श्रद्धा की मौत के लिए , हम सब है ज़िम्मेदार , हम हिंदू , हमारा लचर , मुस्लिम परस्त क़ानून व हमारा ढुल-मूल संविधान- देखिए सब लोग…

थैंक यु, मि. गोडसे

  डॉ. शंकर शरण नाथूराम गोडसे के नाम और उनके एक काम के अतिरिक्त लोग उन के बारे में कुछ नहीं जानते। एक लोकतांत्रिक देश में यह कुछ रहस्यमय बात है। रहस्य का आरंभ 8 नवंबर 1948 को ही हो गया था, जब गाँधीजी की हत्या के लिए चले मुकदमे में गोडसे…

राष्ट्र-चिंतन-भाजपा के ब्राम्हणवाद से हारेगा केजरीवाल

ब्राम्हण 45, जाट 34, राजपूत 22, गुर्जर 17, पंजाबी 31 , वैश्य 21और पिछडे वर्ग को पांच टिकट, ये आकंडे भाजपा के दिल्ली नगर निगम चुनाव में घोषित उम्मीदवारों के हैं। इन आंकड़ो के देखने के बाद यह प्रतीत होता है कि भाजपा जातिवाद की मिसाइल से…

पंजाब में बंदूकवाद का यह कैसा उपचार?

कितनी बड़ी विडंबना है कि जब 13 नवंबर को पंजाब में 'आप' सरकार ने शस्त्रों/हिंसा के सार्वजनिक प्रदर्शन/महिमामंडन पर प्रतिबंध लगाया, तब उसी कालखंड में दो ऐसी घटनाएं सामने आई— जिसने इस आदेश की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। 12 नवंबर को…

पहचान हिंदुत्व की / भाग-2

रविवार, दिनांक 17 अगस्त 2017. गणेशोत्सव का तीसरा दिन है. स्पेन के सुदूर दक्षिणी भाग में, मोरक्को की सीमा के पास, अफ्रीका महाद्वीप में, स्पेन का एक स्वशासी (ऑटोनोमस) शहर है, जिसका नाम है ‘क्यूटा’ (Ceuta). इस शहर में कुछ सिंधी भाषी हिन्दुओं…

🌹दान की महिमा 🌹

एक भिखारी सुबह-सुबह भीख मांगने निकला। चलते समय उसने अपनी झोली में जौ के मुट्ठी भर दाने डाल दिए, इस अंधविश्वास के कारण कि भिक्षाटन के लिए निकलते समय भिखारी अपनी झोली खाली नहीं रखते। थैली देखकर दूसरों को भी लगता है कि इसे पहले से ही किसी ने…

लोकमंथन (23) लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण

24 सितंबर 2022 को एक महत्वपूर्ण सत्र भारतीय लोक परम्पराओं में पर्यावरण और जल संरक्षण पर केंद्रित था। जल सृष्टि के पंच महाभूत तत्वों में से एक है। वैसे तो धरती का 70 प्रतिशत भाग जल से ही भरा है लेकिन यह पीने योग्य नही है।

नशामुक्ति बहाना, ध्येय राजनीतिक दुकान चमकाना

नशामुक्ति के नाम पर शराबबंदी राजनीति का फैशन बन गया है। सत्ता में हिस्सेदारी से वंचित राजनेता शराबबंदी को अपना हथियार बनाते देखे जा सकते हैं। महात्मा गांधी के गुजरात और बिहार में सरकारी स्तर पर तो शराब बंदी लागू है लेकिन दोनों राज्यों में…