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विश्लेषण
विश्व हिन्दू परिषद के अट्ठावन वर्ष और सामाजिक समरसता
हिन्दू समाज की एकता व अखंडता को तार-तार कर उसे जातिवादी, क्षेत्रवादी, भाषावादी व मत-पंथ-संप्रदाय वादी विभेदों में बाँट कर ही मुगलों ने और फिर अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया। विपत्ति चाहे अनगिनत आईं किन्तु, यहाँ के बहुसंख्यक हिन्दू समाज में…
Modi@20 पुस्तक मोदी जी के व्यक्तित्व के अनेक आयामों से परिचय करवाती है- पीएम मोदी
इस अवसर पर अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी के व्यक्तित्व और उनके 50 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को कुछ शब्दों और पलों में समाहित करना बेहद कठिन है। मोदी@20 का मतलब है उनके गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से लेकर आज तक का समय।
कितना बदला जम्मू-कश्मीर?
बलबीर पुंज
जम्मू-कश्मीर से धारा 370-35ए के संवैधानिक क्षरण को शुक्रवार (5 अगस्त) को तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि घाटी में इस दौरान क्या-क्या बदला है? एक विकृत वर्ग कुछ हालिया जिहादी घटनाओं को आधार बनाकर…
दीदी के राज में ग़रीब बेहाल पर उनके नेता मालामाल, ये कैसी राजनीति, ये कैसा कमाल ?
स्निग्धा श्रीवास्तव
कहा जाता है ना बाप बड़ा, ना भैय्या सबसे बड़ा रूपया.......और राजनीति ऐसी चीज है जिसमें कुछ मिले ना मिले घोटाले पैसा कमाने के रास्ते बहुत मिलते है। लेकिन जनता की मेहनत की कमाई को मंत्री इतनी आसानी से डकार मार लें ..यह…
अरूण सिंह ले सकते हैं जेपी नड्डा की जगह
सियासत अक्सर महत्वाकांक्षाओं की गीली मिट्टी से ही आकार पाती है, पर कभी-कभी इस मिट्टी की तासीर इतनी अलग होती है कि वह कुम्हार रूपी जनता को भी चक्कर में डाल देती है।
व्यंग-विनोद: द्वारपाल का सपना
यमराज- द्वारपाल! कुबेर को शक हो गया है कि उनके राजस्व में कमी आ गई है। अश्वनी कुमारों ने कुबेर को जो खुफिया रिपोर्ट भेजी है उसमें शक की सुई हमारे डिपार्टमेंट की ओर है। कारण बताओ! नही तो तुम्हे अभी…
राजधर्म- मध्यमवर्ग के लिए बेदर्द जी एस टी कौंसिल
कल न्यूज़ चैनल पर यह समाचार चौंकाने वाला था कि दूध, दही, छांछ, पनीर, गेंहू, चावल, दाल, मुरमुरे, नमक, पेंसिल, रबर, शार्पनर आदि को जी इस टी कौंसिल वस्तु एवं सेवा कर (जी एस टी) के अंदर ले आई है। अब इन उत्पादों पर 5 प्रतिशत GST लगेगा। यह…
छत्तीसगढ़ देश का सबसे ज्यादा गरीब, दिन के 32 रुपये भी खर्च नहीं कर पाते लोग
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 22जुलाई। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक देश में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। ग्रामीण इलाके में रहने वाला जो व्यक्ति हर दिन 26 रुपये और शहर में रहने वाला व्यक्ति 32…