केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा में ‘विकसित भारत’ हेतु नीडोनॉमिक्स पर व्याख्यान का आयोजन

महेंद्रगढ़, 31 अक्टूबर: “विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए हमें नीडोनॉमिक्स से प्रेरित पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना होगा,” यह विचार तीन बार कुलपति रहे और नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मदन मोहन गोयल ने व्यक्त किए। वे आज केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेंद्रगढ़ के स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज  द्वारा आयोजित व्याख्यान में “विकसित भारत के लिए नीडोनॉमिक्स की प्रासंगिकता” विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे स्वागत भाषण प्रो. रंजन अनेजा, डीन, स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज ने दिया और उन्होंने प्रो. गोयल का परिचय प्रस्तुत किया। विषय की रूपरेखा प्रो. आनंद शर्मा, प्रबंधन अध्ययन विभाग ने समझाई। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव प्रो. पायल कंवर चंदेल, डीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर प्रो. ए.पी. शर्मा, प्रो. सुशीला (अध्यक्ष, वाणिज्य विभाग) तथा प्रो. आनंद (अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग) उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में प्रो. गोयल ने आर्थिक गतिविधियों—जैसे उपभोग, बचत, उत्पादन, निवेश और वितरण—में नीडो-व्यवहार की आवश्यकता पर बल दिया, साथ ही उन्होंने नीडो-ट्रेड की अवधारणा पर प्रकाश डाला, जो “वैश्विक सोच और स्थानीय क्रिया” (Think globally, act locally) के सिद्धांत पर आधारित है।

उन्होंने कहा, “विकसित भारत को नीडो-निर्यात का केंद्र बनने के लिए विपणन में  एन.ए.डब्ल्यू दृष्टिकोण—Need (आवश्यकता), Affordability (सामर्थ्य) और Worth (मूल्य)—अपनाना होगा, जो नीडो-उपभोग द्वारा संचालित हो।”

प्रो. गोयल ने विकसित भारत की परिकल्पना के लिए नीडो-सम्पत्ति, नीडो-स्वास्थ्य और नीडो-सुख की त्रयी को आधारस्तंभ बताया।

उन्होंने नीडो-परमार्थ की भावना पर बल देते हुए कहा, “हमें NSS के आदर्श वाक्य ‘Not Me but You’ (मैं नहीं, तुम) को आत्मसात करना चाहिए और अपनी आय का एक हिस्सा दूसरों के सशक्तिकरण में लगाना चाहिए, ताकि हम समाज के उपयोगी साधन बन सकें।”

उन्होंने उपभोक्ताओं, उत्पादकों, वितरकों, व्यापारियों, नीति-निर्माताओं और राजनेताओं सहित सभी हितधारकों में “आर्थिक व्यवहार की बीमारियों” को दूर करने हेतु व्यवहारिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।

अपने व्याख्यान के समापन पर प्रो. गोयल ने सभी को स्ट्रीट स्मार्ट —Simple (सरल), Moral (नैतिक), Action-oriented (क्रियाशील), Responsive (उत्तरदायी) और Transparent (पारदर्शी)—बनने का आह्वान किया तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए नीडोनॉमिक्स को कॉमन सेंस एप्रोच (सामान्य बुद्धि पर आधारित दृष्टिकोण) के रूप में अपनाने की प्रेरणा दी।

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