चिराग पासवान ने की प्रशांत किशोर की तारीफ, कहा बिहार की राजनीति में निभा रहे ईमानदार भूमिका

समग्र समाचार सेवा
पटना, 24 जुलाई: बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ उस समय आया जब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर की भूमिका को ईमानदार और स्वागत योग्य बताया। राजनीतिक बयानबाज़ी के इस दौर में जब हर नेता एक-दूसरे पर कटाक्ष करने में जुटा है, चिराग पासवान का यह बयान सहिष्णुता और लोकतांत्रिक आदर्शों की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रशांत किशोर के लिए खुले दरवाज़े

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भले ही सीधे तौर पर किसी गठबंधन में न हों, लेकिन उनकी बढ़ती सक्रियता ने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया है। जब चिराग पासवान से पूछा गया कि क्या किशोर ने उनके प्रसिद्ध नारे ‘बिहार पहले, बिहारी पहले’ को हाईजैक किया है, तो उन्होंने शालीनता से कहा कि कोई भी किसी के एजेंडे को नहीं छीन सकता।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि किशोर एक सकारात्मक और ईमानदार भूमिका निभा रहे हैं और ऐसे किसी भी प्रयास का स्वागत होना चाहिए, जो जाति और धर्म से ऊपर उठकर बिहार के विकास की बात करे।

लोकतंत्र में विकल्पों की विविधता ज़रूरी

चिराग पासवान ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती ही यही है कि लोगों के पास कई राजनीतिक विकल्प हों। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य के विकास के लिए काम करने वालों के लिए उनके दरवाज़े हमेशा खुले हैं।

इस बयान से यह भी संकेत मिलते हैं कि भले ही वे सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कर रहे हों, लेकिन वो किसी भी सकारात्मक सहयोग के लिए तैयार हैं।

मतदाता सूची विवाद ने बदली राजनीति की दिशा

इस राजनीतिक गर्माहट के बीच, बिहार की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, एक लाख मतदाता “अज्ञात” हैं, 20 लाख “मृत” और 28 लाख लोग अब अपने पते पर नहीं रहते। इन आंकड़ों ने विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच बयानबाज़ी को और तेज़ कर दिया है।

राजनीतिक समीकरणों की फिर से रचना

243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की चिराग पासवान की घोषणा ने चुनाव पूर्व समीकरणों को झटका दिया है। कांग्रेस और भाजपा इस बयान को लेकर अपने-अपने अनुमान लगा रही हैं। कुछ का मानना है कि चुनाव के बाद एलजेपी (रामविलास) राजग से दूरी बना सकती है।

 

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