उत्तरकाशी में बादल फटने की त्रासदी: राहत में मिली रफ्तार, बचाव युद्धस्तर पर जारी

समग्र समाचार सेवा
उत्तरकाशी, 7 अगस्त:
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में अचानक हुए बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 70 नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। दुर्भाग्यवश, तीन नागरिकों की मौत की पुष्टि की गई है और लगभग 50 अन्य अब भी लापता हैं। बचाव और राहत कार्य तीव्र गति से जारी है।

बचाव अभियान: सेना व प्रशासन की संयुक्त कोशिशें

प्रशासन और भारतीय सेना ने मिलकर रेस्क्यू अभियान तेज गति से चलाया है। घटना स्थल पर एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) समेत आठ सैन्यकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। सेना ने हेलीकॉप्टर और ज़मीनी दलों को तुरंत तैनात कर दिया और 9 सैन्यकर्मियों3 गंभीर रूप से घायल नागरिकों को एयरलिफ्ट कर देहरादून लाया गया है। तीन अन्य नागरिकों को एम्स ऋषिकेश के लिए एम्बुलेंस से रवाना किया गया।

उत्तरकाशी जिला अस्पताल में अब तक आठ घायल नागरिक भर्ती हैं। सेना ने दो शव बरामद किए हैं, जिससे मृतकों की संख्या में संभावित वृद्धि हो सकती है। लापता सैन्यकर्मी और नागरिकों की खोज के लिए विशेष खोज टीमें सक्रिय हैं।

राज्य की प्रतिक्रिया और हिदायत

राज्य सरकार ने इस आपदा पर कड़ी निगरानी रखते हुए प्रभावितों को हरसंभव सहायता देने का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन और स्थानीय निकाय प्रभावित परिवारों की मदद में जुटे हैं। राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और जरूरतमंदों को प्राथमिक चिकित्सा, भोजन, पानी व आश्रय सुविधा मुहैया कराई जा रही है।

सरकार ने स्थानीय समुदायों से अपील की है कि वह पुलिस और प्रशासन के निर्देश मानें, सुरक्षित स्थानों पर स्थित रहें, और आपदा प्रबंधन टीमों को सहयाग दें।

प्रकृति की ताबड़तोड़ प्रतिक्रिया

बादल फटने जैसी घटनाएं पर्वतीय भूगर्भ और भारी वर्षा का मिलाजुला प्रभाव होती हैं। इस हादसे में मिट्टी धंसने की घटना ने मलबा सहित तेज जलधारा उत्पन्न की, जिससे निवास स्थल हिल गए। तेज प्रवाह के चलते, प्रभावित क्षेत्र में हुनर रेस्क्यू टीमों, रक्षा बल और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रह गई।

घटनास्थल की कठिन भूगोलिक स्थिति कारण रेस्क्यू कार्य थम नहीं पाया, लेकिन सैन्य हेलीकॉप्टर, ड्रोन सर्वे, और स्थानीय एफडीआरएफ/ एनडीआरएफ टीमों ने मिलकर बचाव कार्य जारी रखा।

मानवता की रक्षा में हर प्रयास अवश्यम्भावी

बादल फटने की इस त्रासदी ने उत्तराखंडी जनता की संवेदनशीलता और प्रशासन की तत्परता को परखा। जहां तीन घनिष्ठ नागरिकों का यूं चले जाना दिल तोड़ने वाला है, वहीं उन 70 लोगों की सुरक्षा राहत की किरण भी है।

इस हादसे ने याद दिलाया कि पर्वतीय क्षेत्रों में प्रकृति का अनपेक्षित रूप शासन करता है। इसलिए बचाव संरचना सुव्यवस्थित होनी चाहिए और प्रभावितों की सहायता बिना विलंब के तुरंत पहुँचनी चाहिए।

उत्तराखांड सरकार, सेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा रेस्क्यू और राहत में योगदान सराहनीय है। नवगठित खोज टीमें और स्थानीय समुदायों की सहभागिता इस संकट में उजली मानवीय मिसाल है।

इसे देखते हुए, उत्तराखंड की मानवीय संवेदनशीलता और जवाबदेही शासन की अहम भूमिका ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में फुर्ती और एकता ही रक्षा की सबसे मजबूत ढाल होती है।

 

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