मुख्यमंत्री धामी ने गणतंत्र दिवस पर देशवासियों को दी शुभकामनाएँ

गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने दिलाई एकजुटता और राष्ट्र निर्माण की शपथ

  • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 77वें गणतंत्र दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं
  • स्वतंत्रता सेनानियों और राज्य आंदोलनकारियों के बलिदान को याद किया
  • विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान
  • गंगा घाट विवाद पर कहा—धार्मिक संस्थाओं की राय के अनुसार होगा फैसला

समग्र समाचार सेवा
देहरादून | 26 जनवरी: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिन हमें महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और देशभक्तों के बलिदान को स्मरण करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि हमें हमेशा संविधान का सम्मान करते हुए न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

विकसित भारत के संकल्प में सहभागिता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर यह संकल्प लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में हर नागरिक अपनी भूमिका निभाए। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मंत्र को अपनाने पर जोर दिया।

उत्तराखंड दशक को लेकर दिया संदेश

राज्य के विकास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बाबा केदार धाम से दिया गया संदेश ‘यह दशक उत्तराखंड का होगा’, राज्य के लिए एक स्पष्ट रोडमैप है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ना हर उत्तराखंडवासी की जिम्मेदारी है।

राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष को किया याद

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान हुए संघर्षों और आंदोलनकारियों की तपस्या को याद करते हुए कहा कि उनके बलिदान के कारण ही आज उत्तराखंड एक अलग राज्य के रूप में पहचान बना सका है। अब हमारी जिम्मेदारी है कि राज्य को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल किया जाए।

गंगा घाट विवाद पर सरकार का रुख स्पष्ट

हरिद्वार में कुंभ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर चल रहे विवाद पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट है। उन्होंने बताया कि इन धार्मिक स्थलों का संचालन और प्रबंधन तीर्थ सभा, गंगा सभा, केदार सभा, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और संत समुदाय द्वारा किया जाता है। ऐसे में सरकार सभी संबंधित धार्मिक संस्थाओं की राय के अनुसार आगे बढ़ेगी और संबंधित कानूनों का भी अध्ययन किया जाएगा।

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