कर्नाटक: सूखाग्रस्त सूची से नाम कटने पर कांग्रेस विधायक का इस्तीफा

इंदी और चडचण तालुकों को सूखा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल न किए जाने से नाराज विधायक यशवंतरावगौड़ा पाटिल ने विधानसभा स्पीकर को सौंपा अपना त्यागपत्र।

  • कर्नाटक में कांग्रेस विधायक यशवंतरावगौड़ा वी. पाटिल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र की अनदेखी से नाराज होकर विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है।
  • उनके निर्वाचन क्षेत्र के इंदी और चडचण तालुकों को राज्य सरकार द्वारा सूखाग्रस्त (Drought-hit) सूची में शामिल नहीं किया गया था।
  • मुख्यमंत्री ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा है कि विधायक का यह कदम किसानों के हितों और उनके भारी दबाव के चलते उठाया गया है।

बेंगलुरु, 24 सितंबर: कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है, जब सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने अपनी ही सरकार के फैसलों के खिलाफ बागी तेवर अपनाते हुए विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। विजयपुरा जिले के इंदी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस विधायक यशवंतरावगौड़ा वी. पाटिल (Yashavanta Rayagouda V. Patil) ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) को सौंप दिया है। उनका यह कदम उनके निर्वाचन क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण तालुकों—इंदी और चडचण—को राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से घोषित सूखाग्रस्त (Drought-hit) क्षेत्रों की सूची से बाहर रखे जाने के विरोध में उठाया गया है।

किसानों की समस्याओं और अनदेखी से उपजा आक्रोश

विधायक यशवंतरावगौड़ा पाटिल ने अपने त्यागपत्र में यह स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी कई बार सरकार और मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी बातों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई। उन्होंने पत्र में लिखा कि विजयपुरा जिले के अधिकांश तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है, लेकिन उनके क्षेत्र के किसानों की लगातार होती बदहाली और बारिश की कमी के बावजूद इंदी और चडचण की उपेक्षा की गई। उनका कहना था कि दबाव की राजनीति करने वालों को तवज्जो मिल रही है, जबकि सहज और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वालों की अनदेखी हो रही है, जिसके चलते वे अपने क्षेत्र की जनता के प्रति न्याय करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

इस साल दूसरी बार उठाया गया ऐसा कदम

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यशवंतरावगौड़ा पाटिल द्वारा इस साल उठाया गया यह दूसरा ऐसा कदम है। इससे पहले भी वे मंत्रिमंडल में जगह न मिलने के कारण नाराज होकर अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं, जिसे बाद में पार्टी नेताओं के समझाने के बाद उन्होंने वापस ले लिया था। हालांकि, इस बार के इस्तीफे को पूरी तरह से किसानों की पीड़ा और उनके निर्वाचन क्षेत्र के जल संकट व सूखे से जोड़कर देखा जा रहा है। विधानसभा के पटल पर भी इस इस्तीफे को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने का प्रयास किया।

सरकार की प्रतिक्रिया और मनाने की कोशिशें

घटना के तुरंत बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई। मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और विधायक को मनाने के प्रयास शुरू किए। सरकार की ओर से यह सफाई दी गई कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों के चयन के लिए कुछ निश्चित वैज्ञानिक और प्रशासनिक मानक (जैसे वर्षा की कमी और निर्धारित सूखे के दिन) होते हैं, जिनके आधार पर ही सूची तैयार की जाती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विधायक का यह कदम किसी राजनीतिक साजिश का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से उनके क्षेत्र के किसानों के प्रति उनकी चिंता और जनता के दबाव का परिणाम है। बहरहाल, इस घटना से राज्य की राजनीति में प्रशासनिक प्राथमिकताओं और विधायकों की नाराजगी का मुद्दा गरमा गया है।

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