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भारत में विश्व की दूसरी राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला की स्थापना
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सौर सेल अंशांकन के लिए विश्व का पांचवां राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा केंद्र शुरू
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पर्यावरण डेटा की सटीकता और सौर निवेशकों के भरोसे को मिलेगा
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वैज्ञानिक संस्थानों को आत्मनिर्भर भारत की धुरी बताया
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 06 जनवरी: केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल) के 80वें स्थापना दिवस के अवसर पर दो अत्याधुनिक राष्ट्रीय वैज्ञानिक सुविधा केंद्रों का उद्घाटन किया। इनमें विश्व की दूसरी “राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला” और विश्व का पांचवां “सौर सेल अंशांकन के लिए राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा केंद्र” शामिल है।
पर्यावरण शासन में भारत की बड़ी छलांग
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय पर्यावरण मानक प्रयोगशाला पर्यावरण प्रबंधन और शासन के क्षेत्र में भारत के लिए एक निर्णायक कदम है। इस सुविधा के माध्यम से वायु प्रदूषण निगरानी उपकरणों का भारत-विशिष्ट अंशांकन और प्रमाणीकरण संभव होगा, जिससे पर्यावरणीय आंकड़ों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे अभियानों के क्रियान्वयन को वैज्ञानिक आधार मिलेगा।
सौर मेट्रोलॉजी में वैश्विक पहचान
मंत्री ने सौर सेल अंशांकन के लिए राष्ट्रीय प्राथमिक मानक सुविधा केंद्र को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि यह भारत को वैश्विक सौर मेट्रोलॉजी के चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करता है। जर्मनी की पीटीबी के सहयोग से विकसित यह प्रणाली अंशांकन में अत्यंत कम अनिश्चितता प्रदान करती है, जिससे विदेशी एजेंसियों पर निर्भरता घटेगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
एनपीएल: इतिहास और विज्ञान का संगम
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशाला के रूप में एनपीएल स्वतंत्रता-पूर्व काल से भारत की वैज्ञानिक यात्रा का साक्षी रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि दशकों तक देश की आधी आबादी एनपीएल में स्थित परमाणु घड़ी के अनुसार अपनी घड़ियां मिलाती रही, जो भारतीय मानक समय की आधारशिला है।
वैज्ञानिक संस्थान आत्मनिर्भर भारत की रीढ़
उन्होंने कहा कि अब वैज्ञानिक संस्थान केवल शोध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई के साथ मिलकर राष्ट्रीय विकास में प्रत्यक्ष योगदान दे रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद, भारत की वैज्ञानिक क्षमता उसे वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रही है।
गुणवत्ता और माप विज्ञान को मजबूती
कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एनपीएल और सीएसआईआर-सीआईएमएपी द्वारा विकसित कई भारतीय निर्देशक द्रव्यों (बीएनडी) को जारी किया गया। साथ ही, स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सहयोग से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने विश्वास जताया कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में सीएसआईआर-एनपीएल जैसी संस्थाएं देश के वैज्ञानिक और तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करती रहेंगी।
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