दिल्ली protest में बाहर से लाए गए मजदूर

पूनम शर्मा

स्थानीय सूचनाकर्ताओं ने खुलासा किया है कि पिछले दस दिनों से यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों से निर्माण मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों को ट्रेन से दिल्ली लाया गया है। प्रत्येक मजदूर को रोज़ाना 2000 रुपये और मुख्य मिस्त्री को 15-20 लोगों के समूह पर 4000 रुपये प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है।

इन सबको पिछले 10 दिनों से मैसेज मिल रहे थे कि उन्हें दिल्ली लाया जाए। ये मजदूर पेशेवर रूप से दीवार, फुटपाथ, ईंट-पत्थर, रोड साइड स्टोन आदि तोड़ने में माहिर हैं—जिसका उपयोग दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में किया गया।

भुगतान का पैटर्न भी साफ है। सभी लेनदेन छोटी-छोटी रकम में Google Pay के जरिए किए जा रहे हैं, और ये पैसे रोज़ाना अलग-अलग, अज्ञात मोबाइल नंबरों से आ रहे हैं। हालांकि लाभार्थी वही हैं, जिससे फंडिंग के स्रोत को छुपाने की स्पष्ट कोशिश नजर आती है।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक संगठित साजिश है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनती जा रही है। उन्होंने मुख्य हैंडलर, ऑपरेटर और “कॉकरेच जनता पार्टी” विरोध के किंगपिन को तुरंत गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

जैसे-जैसे जांच तेज हो रही है, सबूत एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे दिल्ली की सुरक्षा और मजदूरों के राजनीतिक शोषण पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.