समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 29 जुलाई: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के दिल्ली दौरे ने सियासी गलियारे में हलचल मचा दी है। सोमवार को संसद परिसर में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ लगभग 20 मिनट चली बैठक के बाद से राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को नई हवा मिली है।
राजे की इस मुलाकात पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। फिर भी राजनीतिक विश्लेषण इसे मोदी द्वारा निर्देशित माना जा रहा है, जबकि राजे ने अपने पक्ष से खुलकर कुछ नहीं कहा। एक दिन पहले पिपलोदी गाँव में हुए विद्यालय हादसे में बच्चों की मौत पर जताई गई चिंता और व्यवस्था पर उठाए गए सवालों के बीच यह दिल्ली दौरा काफी मायने रखता है।
वसुंधरा राजे ने राजस्थान के पिपलोदी गांव में स्कूल भवन गिरने से हुई दर्दनाक घटना की निंदा की थी। उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय भवन का समय रहते निरीक्षण हुआ होता, तो यह त्रासदी टल सकती थी। इस संवेदनशील बिंदु के बाद उनकी दिल्ली यात्रा को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
सूत्रों का कहना है कि पीएम मोदी ने वसुंधरा को ख़ुद दिल्ली आने का न्योता दिया। इस कैंपेनिंग के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी दिल्ली में सक्रिय हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह, ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर एवं मंत्री सी.आर. पाटिल से अलग-अलग बैठकों में राजस्थान से जुड़े विकास, जल संसाधन और ईआरसीपी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
राजनीतिक जानकार इसे गठबंधन और सरकार विस्तार की तैयारी के रूप में देख रहे हैं। भाजपा शासन में वसुंधरा और मुख्यमंत्री भजनलाल का दोनों दिल्ली में रहना संकेत दे रहा है कि मंत्रीमंडल की नई टीम में बड़े चेहरे शामिल होने की योजना पर काम चल रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भजनलाल शर्मा को दो-तीन दिनों में कोटा में मंत्रिमंडल विस्तार के क्रम में शामिल किया जा सकता है। वहीं वसुंधरा राजे की बैठक संभावित पुनर्विन्यास या गठबंधन सहभागिता की निशानी मानी जा रही है।
यह दौर राजस्थान की सतत सियासत को मजबूत रखने की रणनीति से भी जुड़ा हुआ है।
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