INDIA गठबंधन की रैली को मंजूरी, मार्च की अनुमति नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 1 नवंबर को विपक्ष का प्रदर्शन; राहुल गांधी ने मिंटो रोड-कनॉट प्लेस से मार्च की घोषणा की, दिल्ली पुलिस ने कहा—इसके लिए अलग से अनुमति नहीं मांगी गई
- INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित है।
- दिल्ली पुलिस ने जनसभा की अनुमति दी है और मैदान 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजकों के लिए बुक है।
- राहुल गांधी ने दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस से मार्च शुरू करने की घोषणा की है।
- दिल्ली पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई और न ही संबंधित जिलों को आधिकारिक जानकारी दी गई।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन की प्रस्तावित ‘चलो दिल्ली’ रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में जनसभा आयोजित करने की अनुमति दी जा चुकी है। हालांकि, कनॉट प्लेस-मिंटो रोड जंक्शन से रामलीला मैदान तक प्रस्तावित मार्च के लिए आयोजकों ने अब तक अलग से अनुमति नहीं मांगी है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि नई दिल्ली और मध्य दिल्ली, दोनों पुलिस जिलों को प्रस्तावित मार्च के संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय सामने आया है जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लोगों से रैली में शामिल होने की अपील की है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर किया मार्च का ऐलान
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इंस्टाग्राम पर आयोजित ‘आस्क मी’ सत्र के दौरान 1 नवंबर के प्रदर्शन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मार्च दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस क्षेत्र से शुरू होकर रामलीला मैदान पहुंचेगा।
राहुल गांधी ने लोगों से इस कार्यक्रम में भाग लेने की अपील भी की।
विपक्षी गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन आयोजित कर रहा है।
हालांकि, इस प्रस्तावित मार्च की आधिकारिक सूचना दिल्ली पुलिस को नहीं मिलने के कारण इसके आयोजन और सुरक्षा प्रबंधों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
दो पुलिस जिलों ने कहा—मार्च की अनुमति नहीं मांगी गई
नई दिल्ली और मध्य दिल्ली जिलों के दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित मार्च के संबंध में उनके कार्यालयों से कोई अनुमति नहीं मांगी गई है।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह और नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने भी पुष्टि की कि उन्हें मार्च के संबंध में आयोजकों की ओर से संपर्क या औपचारिक सूचना नहीं मिली है।
पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यदि विपक्षी नेता और समर्थक बिना अलग अनुमति के मार्च निकालने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें रोका जाएगा या नहीं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पुलिस स्थिति पर निगरानी रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे।
रामलीला मैदान की रैली के लिए पहले ही मिल चुकी है अनुमति
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को स्पष्ट किया था कि रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली आयोजित करने की अनुमति वापस नहीं ली गई है।
पुलिस के अनुसार, आयोजकों के लिए रामलीला मैदान 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक बुक किया गया है।
रैली की अनुमति 17 अक्टूबर को प्रदान की गई थी और उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
यह स्पष्टीकरण कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल के उस आरोप के बाद आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आवश्यक अनुमति होने के बावजूद पुलिस ने पार्टी नेताओं को कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां करने से रोका।
दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों के जवाब में कहा कि जनसभा आयोजित करने की अनुमति पहले की तरह प्रभावी है।
जनसभा और सड़क मार्च की अनुमति में अंतर
दिल्ली पुलिस के स्पष्टीकरण से यह महत्वपूर्ण अंतर सामने आया है कि किसी निर्धारित मैदान में राजनीतिक जनसभा आयोजित करने की अनुमति और सार्वजनिक सड़कों पर मार्च निकालने की अनुमति अलग-अलग विषय हैं।
सड़क मार्च के दौरान यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण होती हैं।
इसी कारण पुलिस प्रस्तावित मार्ग, प्रतिभागियों की संख्या और कार्यक्रम के समय जैसी जानकारियों के आधार पर आवश्यक प्रबंध करती है।
हालांकि, राजनीतिक दलों और नागरिकों को शांतिपूर्ण सभा तथा अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता प्राप्त है, जिसका प्रयोग लागू कानूनी प्रावधानों और सार्वजनिक व्यवस्था संबंधी आवश्यकताओं के अंतर्गत किया जाता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का प्रदर्शन
INDIA गठबंधन की रैली का प्रमुख उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को सार्वजनिक मंच पर उठाना है।
विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।
ऐसे में चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए आरोपों का मूल्यांकन प्रमाण, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और संबंधित संस्थाओं के आधिकारिक पक्ष के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
1 नवंबर के कार्यक्रम पर निगाहें
फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से रामलीला मैदान की जनसभा के लिए अनुमति प्रभावी है, जबकि वहां तक प्रस्तावित मार्च के लिए अलग अनुमति की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। आगामी कार्यक्रम के दौरान पुलिस और आयोजकों के बीच समन्वय, यातायात व्यवस्था तथा शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा।
अब मुख्य प्रश्न यह है कि क्या आयोजक प्रस्तावित मार्च के लिए आवश्यक औपचारिक प्रक्रिया पूरी करेंगे और क्या 1 नवंबर का प्रदर्शन निर्धारित सुरक्षा व्यवस्थाओं के अनुरूप संपन्न होगा।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह पूरे घटनाक्रम पर निगरानी बनाए हुए है और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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