धर्म जीवन को मर्यादा और संतुलन का मार्ग दिखाता है: डॉ. मोहन भागवत

नागौर के छोटी खाटू में 162वां मर्यादा महोत्सव भव्य रूप से संपन्न

  • नागौर के छोटी खाटू में 162वें मर्यादा महोत्सव का भव्य आयोजन
  • आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में सरसंघचालक मोहन भागवत का मार्गदर्शन
  • धर्म, मर्यादा, अनुशासन और संतुलन पर विस्तृत विचार
  • पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक सहभागिता का उदाहरण

समग्र समाचार सेवा
नागौर, 23 जनवरी: नागौर जिले के छोटी खाटू कस्बे में 162वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर विशाल और भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ। आचार्य महाश्रमण के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मार्गदर्शन दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, मातृशक्ति और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आचार्य महाश्रमण का संदेश

आचार्य महाश्रमण ने कहा कि अच्छी वाणी भी रत्न के समान होती है, किंतु नासमझ व्यक्ति उसे पहचान नहीं पाते। ग्रंथ, शास्त्र और संतों की वाणी मानव की समझ और सामर्थ्य को बढ़ाती है तथा जीवन की दिशा तय करती है। उन्होंने बताया कि माघ शुक्ल सप्तमी को प्रथम गुरुवर द्वारा प्रथम विधान का शुभारंभ हुआ और चौथे गुरु दयाचार्य जी ने मर्यादा महोत्सव की परंपरा प्रारंभ की।
उन्होंने यह भी कहा कि राजतंत्र और लोकतंत्र दोनों में अनुशासन और मर्यादा आवश्यक हैं। शांति हमारा साध्य है, किंतु शांति की रक्षा के लिए कड़ाई का पालन भी आवश्यक हो सकता है।


धर्म और राष्ट्रीय दृष्टि

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि भारत सदैव दुनिया को मर्यादा सिखाने वाला देश रहा है। धर्म हमें करणीय और अकरणीय का ज्ञान देता है। अहिंसा हमारी मूल नीति है, किंतु देश की सुरक्षा के लिए सामर्थ्य और शस्त्र की आवश्यकता पड़ती है।
उन्होंने कहा कि भारत में श्रेष्ठ लोग केवल उपदेश नहीं देते, बल्कि अपने जीवन में उसे उतारते हैं। दान भारत की जीवन-परंपरा है यहां कमाया हुआ बांटने की सीख दी जाती है। हम सब भिन्न दिखते हैं, पर मूल में एक हैं; यही भाव जीवन में मर्यादा लाता है।

वैश्विक परिदृश्य और भारतीय संतुलन

डॉ. भागवत ने कहा कि जहाँ कई देश केवल स्वार्थ को प्राथमिकता देते हैं, वहीं भारत विश्व की चिंता करता है। आपदा के समय भारत ने सेवा का मार्ग अपनाया है। कृषि के क्षेत्र में भी भारतीय दृष्टि संतुलन पर आधारित है कीटों का नियंत्रण, पूर्ण विनाश नहीं। यही संतुलन व्यवहार और नीति में भी आवश्यक है।

अनुकरणीय आयोजन

कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया। प्लास्टिक के गिलासों का प्रयोग नहीं किया गया और भोजन सामग्री के अपव्यय से बचने की व्यवस्था रही। ग्रामवासियों ने कंधे से कंधा मिलाकर श्रद्धालुओं की सेवा की। आयोजन समिति के अध्यक्ष मनसुख भाई सेठिया ने अतिथियों और श्रद्धालुओं का स्वागत किया।

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