समग्र समाचार सेवा
पटना, 5 अगस्त: बिहार में हाल ही में घोषित डोमिसाइल नीति को लेकर राजनीतिक हलकों में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार प्रकट किया है। उन्होंने इसे बिहार के युवाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
शांभवी चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने डोमिसाइल नीति लागू करने जैसा साहसी और ज़रूरी फैसला लिया है। हमने पहले भी कई मंचों से यह मांग उठाई थी और हमारे नेता चिराग पासवान ने भी डोमिसाइल के पक्ष में लगातार आवाज़ बुलंद की है।”
#WATCH दिल्ली: बिहार में डोमिसाइल नीति की घोषणा पर LJP (रामविलास) सांसद शांभवी चौधरी ने कहा, "मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जिन्होंने यह फैसला लिया है। पहले भी हमने कई मंच से कहा है कि डोमिसाइल लागू होना चाहिए। चिराग पासवान ने भी डोमिसाइल के पक्ष में अपनी बातों को रखा है। जब से… pic.twitter.com/P3eO9GzlQa
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 5, 2025
उन्होंने आगे कहा कि जब से बिहार में सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू हुई थी, तभी से राज्य के युवाओं की एक बहुत बड़ी मांग रही है कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। “डोमिसाइल नीति से बिहार के युवाओं को न केवल न्याय मिलेगा, बल्कि उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर भी प्राप्त होगा,” उन्होंने कहा।
सांसद शांभवी चौधरी ने इस फैसले को राजनीति से ऊपर उठकर लिया गया जनहितैषी निर्णय बताया और कहा कि राज्य के तमाम युवा इस नीति का स्वागत कर रहे हैं। “यह एक ऐसा कदम है, जो हर घर तक उम्मीद की किरण लेकर पहुंचेगा,” उन्होंने जोड़ा।
डोमिसाइल नीति के अंतर्गत, अब बिहार में सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को राज्य का निवासी होना आवश्यक होगा। यह नीति न केवल राज्य के बेरोजगार युवाओं को अवसर प्रदान करेगी, बल्कि बिहार से पलायन की समस्या पर भी नियंत्रण में मददगार साबित हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से नीतीश कुमार सरकार को युवाओं के बीच मजबूत समर्थन मिल सकता है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले। वहीं, लोजपा (रामविलास) जैसे सहयोगी दल भी इस मुद्दे पर सरकार के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
विपक्षी दलों की ओर से अभी तक कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन चर्चा यह भी है कि आगे इस नीति के क्रियान्वयन और प्रभाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो सकती है।
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