पदक्रम से ऊपर संवाद जरूरी, औपनिवेशिक परंपराओं की समीक्षा का समय: डॉ. जितेंद्र सिंह
स्वतंत्रता-पूर्व प्रथाओं से आगे बढ़े प्रशासन, भारतीय मूल्यों के अनुरूप बदलाव जरूरी: डॉ. सिंह
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कार्मिक मंत्रालय में नववर्ष कार्य समीक्षा, कनिष्ठ अधिकारियों सहित सभी स्तर के अधिकारी शामिल
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पदक्रम और प्रोटोकॉल से मुक्त पारस्परिक संवाद पर विशेष जोर
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औपनिवेशिक दौर की प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की आवश्यकता बताई
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एपीआर/एपीएआर प्रणाली को सरल और स्वचालित बनाने पर बल
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली। 15 जनवरी: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कार्मिक मंत्रालय में नववर्ष कार्य समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि किसी भी प्रशासनिक संस्था के प्रभावी और सुचारू संचालन के लिए पदक्रम या प्रोटोकॉल की बाधाओं से मुक्त खुला और स्वतंत्र संवाद अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों सहित सभी अधिकारियों से स्पष्ट और निर्भीक रूप से अपने विचार रखने का आग्रह किया।
पदक्रम से ऊपर संवाद पर जोर
डॉ. सिंह ने कहा कि वे अधिकारियों की प्रत्येक बात को गंभीरता से सुनने के लिए तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दक्षता केवल आदेश-निर्देश से नहीं, बल्कि आपसी संवाद और विश्वास से आती है।
औपनिवेशिक प्रथाओं की समीक्षा की जरूरत
बैठक में उन्होंने कहा कि आज भी कई आधिकारिक प्रक्रियाएं स्वतंत्रता-पूर्व की परंपराओं पर आधारित हैं, जिनकी वर्तमान लोकतांत्रिक और प्रौद्योगिकी-संचालित भारत में प्रासंगिकता की गहन समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं के भारतीयकरण पर जोर देते हुए कहा कि इन्हें भारतीय मूल्यों और समकालीन शासन आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना समय की मांग है।
प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली में सुधार
डॉ. जितेंद्र सिंह ने एपीआर/एपीएआर जैसी वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रणालियों को सरल, अधिक उद्देश्यपूर्ण और परिणामोन्मुखी बनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सरलीकरण और स्वचालन से व्यक्तिपरकता और पूर्वाग्रह कम होंगे तथा पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे कर्मचारियों और संस्थानों दोनों को लाभ होगा।
करियर प्रगति और क्षमता निर्माण
बैठक में सिविल सेवाओं में करियर प्रगति, विशेषज्ञता और अवर सचिव स्तर पर लंबे समय तक ठहराव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने अधिकारियों को उनके अनुभव और विशेषज्ञता के अनुरूप तैनाती देने पर बल दिया, ताकि संस्थागत ज्ञान संरक्षित रह सके। साथ ही, भूमिका-आधारित प्रशिक्षण और नौकरी की भूमिकाओं के पुनर्गठन जैसी क्षमता निर्माण पहलों को और प्रभावी बनाने की बात कही।
नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा
डॉ. सिंह ने दोहराया कि सरकार सामंती और पुरानी प्रथाओं से आगे बढ़कर अधिक कुशल, नागरिक-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक ढांचे की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि कम कागजी कार्रवाई, सरल प्रक्रियाएं और स्वचालन से अधिकारी प्रक्रियाओं के बजाय परिणामों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जो “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” की भावना के अनुरूप है।
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