पाक संसद में गूंजा ‘गजवा-ए-हिंद’, सांसद मुजाहिद अली के भड़काऊ भाषण से मचा बवाल

समग्र समाचार सेवा
इस्लामाबाद, 20 जून: पाकिस्तान की नेशनल असेंबली गुरुवार को उस वक्त विवादों के घेरे में आ गई जब सत्तारूढ़ दल से जुड़े सांसद मुजाहिद अली ने संसद में ‘गजवा-ए-हिंद’ और इस्लामी जेहादी अवधारणाओं का खुला समर्थन करते हुए एक कट्टरपंथी भाषण दे डाला। हिंदू, ईसाई और यहूदी समुदायों को लेकर की गई उनकी टिप्पणियों ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

कट्टरपंथ की खुलेआम वकालत

मुजाहिद अली ने अपने भाषण में दावा किया कि इस्लाम के खिलाफ विश्व स्तर पर साजिशें रची जा रही हैं और गैर-मुस्लिम समुदाय मुस्लिम समाज को कमजोर करने की “फूट डालो और राज करो” नीति पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही ‘खुरासान’ से काली पगड़ी पहने हुए लड़ाके उठेंगे जो इस्लाम की रक्षा करेंगे—एक ऐसा विचार जो इस्लामिक हदीसों से जुड़ा है और आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रचारित किया जाता रहा है।

‘हिंदू दुश्मन’ पर टिप्पणी और पाक फौज का महिमामंडन

अली ने अपने भाषण में पाकिस्तान को “इस्लामी दुनिया का हेडक्वार्टर” बताते हुए कहा कि पाकिस्तानी सेना तब सबसे अधिक उत्साहित होती है जब उसका सामना “हिंदू दुश्मन” से होता है। उन्होंने कहा, “भारत हमसे ताकत में आगे हो सकता है, लेकिन हमारे पास कलमे की ताकत है, जो एटम बम से भी बड़ी है।” उनका यह बयान भारत विरोधी कट्टरपंथी मानसिकता को उजागर करता है।

संसद में समर्थन, बाहर आलोचना

सबसे हैरानी की बात यह रही कि संसद में मौजूद कई सांसदों ने उनके भाषण के दौरान मेज थपथपाकर समर्थन जताया। इससे यह संकेत मिला कि पाकिस्तान की विधायिका में कट्टरपंथ को खुला समर्थन मिल रहा है। हालांकि विपक्ष के कुछ सदस्यों और अल्पसंख्यक प्रतिनिधियों ने बाद में बयान की आलोचना करते हुए इसे पाकिस्तान के लोकतंत्र और सहिष्णुता के लिए खतरनाक बताया।

ISI और सेना की सोच पर भी उठे सवाल

मुजाहिद अली के बयान ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी ISI की कट्टरपंथी मानसिकता को भी रेखांकित किया है। भाषण में जिस प्रकार से ‘हिंदू दुश्मन’, ‘गजवा-ए-हिंद’ और ‘कलमे की ताकत’ का उल्लेख किया गया, उससे सुरक्षा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि यह बयान केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि गहरे राजनीतिक समर्थन की ओर संकेत करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की विचारधाराएं पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग कर सकती हैं और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

 

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