पाकिस्तान पर फारूक अब्दुल्ला का विवादित बयान, भाजपा का पलटवार

बारामूला में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बोले फारूक अब्दुल्ला— पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिंदा रखा, दिल्ली से न्याय की उम्मीद नहीं।

  • फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को जीवित रखा है।
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष ने दिल्ली से न्याय मिलने की उम्मीद पर उठाए गंभीर सवाल।
  • भाजपा नेता रविंदर रैना ने बयान को राष्ट्रविरोधी और बेहद निंदनीय करार दिया।

समग्र समाचार सेवा
बारामूला, 25 अक्तूबर: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के एक ताजा बयान ने देश और प्रदेश की राजनीति में भारी भूचाल ला दिया है। बारामूला में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि पड़ोसी देश पाकिस्तान ने ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को अब तक जीवित और प्रासंगिक बनाए रखा है। उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे राष्ट्रविरोधी तथा पाकिस्तान की तरफदारी करने वाला बयान करार दिया है।

‘पाकिस्तान ही कश्मीर मुद्दे को वैश्विक मंच पर उठा रहा है’

बारामूला में जनसभा को संबोधित करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी देश है और वह दुनिया भर में लगातार इस बात को उठाता है कि कश्मीर मुद्दे पर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण नई दिल्ली बैकफुट पर रहती है और दबाव में चुप बैठती है।

अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा यह पड़ोसी देश बार-बार वैश्विक समुदाय का ध्यान कश्मीर की तरफ खींचता है, जिससे दिल्ली पर एक दबाव बनता है। पाकिस्तान हर जगह जाकर कहता है कि कश्मीर समस्या अनसुलझी है। एक तरह से वही हमें बचा रहा है, हालांकि मैं उनके इरादों को पूरी तरह से नेक नहीं मानता।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे केवल केंद्र सरकार के भरोसे न बैठें और खुद हिम्मत जुटाकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

केंद्र सरकार और दिल्ली से न्याय मिलने पर उठाए सवाल

अपने भाषण के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने नई दिल्ली से न्याय मिलने की उम्मीद पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने जनसमूह से पूछा, “क्या आप अपनी सारी उम्मीदें सिर्फ दिल्ली पर टिकाकर रखेंगे? क्या आपको सचमुच यह लगता है कि वहां बैठा शासन आपको न्याय दिलाएगा? अगर आप खुद में हिम्मत नहीं जुटाएंगे, तो आपका अस्तित्व और पहचान पूरी तरह मिटा दी जाएगी।” उन्होंने उपस्थित लोगों से एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान किया। फारूक अब्दुल्ला के इस बयान को केंद्र सरकार के प्रति उनके अविश्वास और आक्रामक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

भाजपा का तीखा पलटवार: ‘फारूक अब्दुल्ला का बयान देशद्रोह के समान’

फारूक अब्दुल्ला की इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत और कड़ा पलटवार किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने इस बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय और देशद्रोही सोच का प्रतीक बताया। रैना ने कहा कि जिस पाकिस्तान ने पिछले 35 वर्षों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को पोषित किया, निर्दोष लोगों का खून बहाया और घाटी को श्मशान में बदलने की साजिशें रचीं, उसे फारूक अब्दुल्ला ‘रक्षक’ के रूप में पेश कर रहे हैं।

रविंदर रैना ने कहा, “पाकिस्तान ने घाटी में एके-47, आरडीएक्स और हथगोले भेजकर हजारों बेगुनाह कश्मीरियों, सुरक्षाबलों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्याएं कराई हैं। फारूक अब्दुल्ला जैसे वरिष्ठ नेता का उस आतंकवादी देश को कश्मीरी जनता का हितेषी और रक्षक बताना शहीदों के बलिदान का अपमान है। यह बयान साबित करता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।”

राजनीतिक विश्लेषकों की राय और संभावित परिणाम

राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में हालिया राजनीतिक बदलावों और केंद्र शासित प्रदेश के माहौल में फारूक अब्दुल्ला का यह बयान बेहद संवेदनशील समय पर आया है। भारत हमेशा से ही यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है तथा इससे जुड़ा कोई भी विषय पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कश्मीर राग का हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है। ऐसे में फारूक अब्दुल्ला द्वारा पाकिस्तान की भूमिका को इस तरह रेखांकित करना आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक विवादों को जन्म दे सकता है।

निष्कर्ष

बारामूला में फारूक अब्दुल्ला द्वारा दिया गया यह बयान न केवल राज्य की सियासत का तापमान बढ़ा रहा है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टिकोण से चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। एक तरफ जहां नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे स्थानीय जनता की आवाज बता रही है, वहीं सत्ताधारी दल इसे देश विरोधी नैरेटिव गढ़ने की कोशिश मान रहा है।

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